गाजीपुर। गंगा नदी के जलस्तर में हाल ही में आई वृद्धि ने जनपद के किसानों की कमर तोड़ दी है। कुछ सप्ताह पहले नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर चला गया था, जिससे जिले की पांच तहसीलों के सौ से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी भर गया। सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई और धान, गन्ना सहित अन्य खरीफ फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। किसानों की सालभर की मेहनत और निवेश देखते ही देखते पानी में डूब गया।
अब शासन स्तर पर प्रभावित किसानों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एडीएम एवं नोडल आपदा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार लेखपाल गांव-गांव जाकर फसल नुकसान का सर्वे कर रहे हैं। आपदा विभाग की टीम नुकसान के आंकलन को तेजी से पूरा कर रही है ताकि किसानों को समय पर मुआवजा उपलब्ध कराया जा सके।
शासन ने मुआवजे की दरें भी निर्धारित कर दी हैं। सिंचित क्षेत्र के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा असिंचित क्षेत्र के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक अब तक 1,053 खेतों का सर्वे पूरा कर लिया गया है। सर्वे के बाद डेटा को कृषि निवेश पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और कोई भी पात्र किसान मुआवजे से वंचित न हो।
किसानों का कहना है कि बाढ़ ने उन्हें भारी आर्थिक संकट में डाल दिया है। हालांकि मुआवजे की प्रक्रिया शुरू होने से उन्हें कुछ राहत की उम्मीद जगी है। प्रशासन का दावा है कि हर प्रभावित किसान तक सहायता पहुंचाई जाएगी। अब किसानों की निगाह शासन द्वारा घोषित मुआवजे के शीघ्र वितरण पर टिकी है।
गाजीपुर: बाढ़ से तबाह फसलें, मुआवजे के लिए सर्वे शुरू

