पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन द्वारा महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इस बयान को लेकर विभिन्न दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। बयान के बाद से पप्पू यादव कई नेताओं के निशाने पर आ गए हैं और इसे लेकर सार्वजनिक बहस भी तेज हो गई है।
विवादित बयान से बढ़ा राजनीतिक तनाव:
कुछ दिन पहले पप्पू यादव ने भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका को लेकर एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि अधिकांश महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बिस्तरों से शुरू होता है और राजनीति में महिलाओं के शोषण की संस्कृति गहराई तक फैली हुई है। इस टिप्पणी के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
भाजपा सांसद मैथिली ठाकुर की कड़ी प्रतिक्रिया:
पप्पू यादव के बयान की निंदा करते हुए मैथिली ठाकुर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक है और ऐसे बयान देने वाले व्यक्ति को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही माफी मांगी जाए, लेकिन इस तरह के बयान से जो आघात पहुंचा है, उसे आसानी से भुलाया नहीं जा सकता।
महिला नेताओं पर टिप्पणी को बताया अभद्र:
मैथिली ठाकुर ने इस बयान को महिला नेताओं के प्रति अपमानजनक बताते हुए कहा कि यह बेहद अभद्र टिप्पणी है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि वह ऐसे परिवार से आती हैं जहां माहौल को समझकर निर्णय लिया जाता है और उनके परिवार ने भरोसे के साथ उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। ऐसे में महिलाओं पर इस तरह का आरोप लगाना न केवल अनुचित है बल्कि उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला भी है।
माफी में भी शर्त का जिक्र:
विवाद बढ़ने के बाद पप्पू यादव ने अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी भी मांगी, लेकिन उनके माफीनामे में शर्त होने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि यदि उनके शब्दों से महिलाओं को ठेस पहुंची है तो वह उनसे माफी मांगते हैं, लेकिन यह माफी केवल बहनों और बेटियों के लिए है, राजनेताओं के लिए नहीं।
बयान पर सफाई और रुख स्पष्ट:
पप्पू यादव ने आगे कहा कि उनका विरोध उन नेताओं के खिलाफ है जिन पर यौन उत्पीड़न के आरोप और सबूत मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह राजनीति में सक्रिय महिलाओं के खिलाफ गलत नजर रखने वालों के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। हालांकि, उनके इस स्पष्टीकरण के बावजूद विवाद कम होता नहीं दिख रहा है और बयान को लेकर सियासी बहस जारी है।
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