SIR के तनाव ने ले ली लेखपाल की जान?

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। SIR में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत सुधीर कुमार ने अपनी शादी से ठीक एक दिन पहले फांसी लगाकर जान दे दी। इस घटना ने परिवार, स्थानीय लोगों और सहकर्मियों को सदमे में डाल दिया है। परिजन इसे गहरे मानसिक दबाव का नतीजा बता रहे हैं।

छुट्टी न मिलने से बढ़ा तनाव:
परिजनों का कहना है कि सुधीर कुमार ने अपनी शादी के लिए संस्था SIR में छुट्टी के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं दी गई। इससे वह लगातार दबाव में था। परिवार का आरोप है कि छुट्टी न मिलने से युवक मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया था।

काम पर न जाने पर घर पहुंचा कानूनगो:
परिवार के अनुसार, सुधीर निर्धारित समय पर काम पर नहीं गया तो संबंधित विभाग का कानूनगो उसके घर पहुंच गया। परिवार का दावा है कि कानूनगो ने नौकरी से निकालने की बात कही और कड़े शब्दों में चेतावनी देकर दबाव बढ़ा दिया। इसी मानसिक तनाव के बाद स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सुधीर ने खुद को फांसी पर लटका लिया।

परिवार का गहरा आरोप—मानसिक दबाव बना कारण:
सुधीर के रिश्तेदारों का कहना है कि शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी उसे राहत नहीं दी गई। परिजनों का मानना है कि उस पर बना मानसिक दबाव उसकी मृत्यु का मुख्य कारण बन गया। परिवार ने इसकी पूरी जांच की मांग की है ताकि पता चल सके कि आखिर किन परिस्थितियों ने उसे इतना मजबूर किया।

गांव और क्षेत्र में शोक का माहौल:
घटना के बाद गांव में माहौल गमगीन है। जिस युवक की शादी की तैयारी परिवार कर रहा था, उसी युवक की अर्थी उठने से सभी सदमे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना कार्यस्थल के दबाव और संवेदनहीन रवैये की भयावह सच्चाई को सामने लाती है।

सरकारी तंत्र और कार्यशैली पर उठे सवाल:
स्थानीय लोगों और समाज के कई व्यक्तियों ने कहा कि यदि कार्यस्थल पर संवेदनशीलता बरती जाती और समय पर छुट्टी का निर्णय लिया जाता, तो शायद यह घटना टल सकती थी। लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ता कार्यस्थल तनाव और चेतावनी का भय कई युवाओं को मानसिक रूप से तोड़ देता है।

परिवार ने जांच की मांग की:
परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किन परिस्थितियों में सुधीर को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा। उनका कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कार्यस्थलों पर मानवता और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।

आज भी सवाल कायम:
सवाल यह बना हुआ है कि एक युवा, जिसकी शादी अगले ही दिन थी, वह किस मजबूरी में ऐसे कदम उठाने को विवश हुआ? यह घटना सिस्टम, कार्यस्थल के दबाव और व्यवस्था की कठोरता पर कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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