भारत समाचार के लखनऊ ब्यूरो के वरिष्ठ संवाददाता सीमाब नकवी को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।

लखनऊ (Lucknow)/फतेहपुर (Fatehpur) के वर्ष 2009 के चर्चित हत्याकांड में फतेहपुर की जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 साल बाद दोषियों को सजा सुनाई है। थाना हथगांव (Hathgaon) में दर्ज इस मामले में अदालत ने दोष सिद्ध होने पर भारत समाचार (Bharat Samachar) से जुड़े पत्रकार सीमाब नक़वी (Seemab Naqvi) सहित अन्य अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय के आदेश के बाद दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

मामला 2009 के हत्या कांड से जुड़ा:
यह प्रकरण मुसं-219/2009 से संबंधित बताया गया है, जिसकी सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। मामले में एसटी नं0-297/2010 के तहत धारा 147, 148, 149, 307 और 302 भादवि के अंतर्गत आरोप तय किए गए थे। 17 वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने दोष सिद्ध मानते हुए सजा का ऐलान किया।

एएसजे/एडीजे कोर्ट का फैसला:
दिनांक 20.02.2026 को एएसजे/एडीजे कोर्ट नं-02, जनपद फतेहपुर ने सुनवाई पूरी करते हुए अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में दंडित किया। धारा 147 और 148 के अंतर्गत दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास और अर्थदंड, धारा 307/149 के अंतर्गत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और अर्थदंड, जबकि धारा 302/149 के अंतर्गत आजीवन कारावास और 20,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त एक वर्ष का कारावास भुगतना होगा। प्रत्येक अभियुक्त पर कुल 34,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पैरवी:
पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश (Director General of Police, Uttar Pradesh) द्वारा चलाए गए विशेष अभियान ऑपरेशन कन्विक्शन (Operation Conviction) के अंतर्गत इस मामले को चिन्हित किया गया था। पुलिस अधीक्षक फतेहपुर (Superintendent of Police, Fatehpur) के पर्यवेक्षण और अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में मॉनिटरिंग सेल, फतेहपुर ने प्रभावी पैरवी की।

दोषियों की सूची:
अदालत ने शाहिद राजा, सलमान, सिकंदर, सीमाब नक़वी, मोबीन, मसरूर, गय्यूर मोईन जैदी, असगर, रूकनुद्दीन, रमेश चंद्र, मुहम्मद हई और फरहान अब्बास उर्फ बासू को दोषी ठहराया। सभी अभियुक्तों को संबंधित धाराओं में सजा सुनाई गई है।

मान्यता पर उठे सवाल:
बताया जा रहा है कि सीमाब नक़वी राजधानी लखनऊ में सक्रिय पत्रकार के रूप में कार्यरत थे और उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) से मान्यता भी प्राप्त थी। सजा सुनाए जाने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि गंभीर आपराधिक मुकदमा लंबित रहने के बावजूद उनकी मान्यता कैसे जारी रही। इस मुद्दे पर संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल:
फैसले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल देखी जा रही है। लंबे समय तक चले इस मुकदमे में सजा सुनाए जाने को न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस विभाग ने इसे प्रभावी पैरवी और साक्ष्यों के आधार पर न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम बताया है।

पुलिस टीम की भूमिका:
मॉनिटरिंग सेल, फतेहपुर की टीम में निरीक्षक महेंद्र सिंह, उपनिरीक्षक अश्विनी वर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने पैरवी में सहयोग किया। विवेचना और अभियोजन पक्ष की सक्रिय भूमिका के चलते अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाया।

इस फैसले को लेकर आमजन में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ने की बात कही जा रही है।


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