वाराणसी: केंद्रीय मंत्री के सामने किसानों का हंगामा, बीच में ही प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर निकले कमलेश पासवान

वाराणसी में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान को किसानों के विरोध के चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में ही छोड़कर बाहर निकलना पड़ा। यह घटना 1 फरवरी को उस समय हुई, जब वह सर्किट हाउस में मोदी सरकार के बजट पर चर्चा करने पहुंचे थे। कार्यक्रम शुरू होते ही बड़ी संख्या में किसान वहां पहुंच गए और काशी द्वार आवासीय योजना के तहत अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे को लेकर सवाल उठाने लगे। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और नारेबाजी शुरू हो गई।

काशी द्वार योजना को लेकर किसानों का विरोध:
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पिंडरा क्षेत्र से आए किसानों ने काशी द्वार आवासीय योजना के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। किसान मंच के नजदीक पहुंच गए और केंद्रीय मंत्री को बोलने से रोक दिया। नारेबाजी के बीच किसानों ने आरोप लगाया कि योजना के तहत उनकी उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन इसके बदले उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा।

मंच के पास पहुंचकर हुई तीखी बहस:
किसानों के अचानक विरोध के कारण स्थिति बेकाबू होने लगी। कई किसान मंच के करीब आकर केंद्रीय मंत्री से बहस करने लगे। इस दौरान मंत्री और किसानों के बीच कहासुनी भी हुई। काफी देर तक हंगामा चलता रहा, जिससे प्रेस कॉन्फ्रेंस बाधित हो गई और कार्यक्रम की गरिमा पर भी असर पड़ा।

मंत्री ने समझाने की कोशिश की, नहीं माने किसान:
किसानों की नाराजगी को देखते हुए केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान ने पहले उन्हें शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सभी अपनी बात शांति से रखें और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा। मंत्री ने संवाद का भरोसा दिलाया, लेकिन इसके बावजूद किसान शांत नहीं हुए और लगातार नारेबाजी करते रहे।

हालात बिगड़े तो मंत्री ने छोड़ा कार्यक्रम:
लगातार बढ़ते हंगामे और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए केंद्रीय मंत्री मंच से उतर गए और सर्किट हाउस से बाहर निकल गए। मंत्री के जाने के बाद भी किसानों का प्रदर्शन जारी रहा। मौके पर मौजूद स्थानीय नेताओं ने स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने संभाला मोर्चा, 10 किसान हिरासत में:
सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शन कर रहे किसानों को नियंत्रित किया। पुलिस ने हंगामा कर रहे 10 किसानों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हो सकी, लेकिन किसानों में आक्रोश बना रहा।

किसानों का एलान- जमीन नहीं देंगे:
विरोध प्रदर्शन में मानापुर, चनौली, चकइन्दर और जद्दुपुर गांवों के किसान शामिल थे। किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। उनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे जेल जाने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन का सौदा नहीं करेंगे।

10 गांवों की जमीन अधिग्रहण का आरोप:
किसानों ने बताया कि सरकार पिंडरा तहसील क्षेत्र के 10 गांवों की 800 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित करना चाहती है। इस जमीन पर काशी द्वार आवासीय योजना के तहत हाईटेक कॉलोनी विकसित करने की योजना है। आवास विकास परिषद द्वारा 7 गांवों में सर्वे पूरा किया जा चुका है, जबकि 3 गांवों में किसानों के विरोध के कारण काम रुका हुआ है।

मुआवजे को लेकर उठे गंभीर सवाल:
किसानों का कहना है कि करोड़ों की कीमत वाली जमीन का मुआवजा लाखों में तय किया जा रहा है। डीएम सर्किल रेट नहीं बढ़ाया गया और रजिस्ट्री भी रोक दी गई है। किसानों ने चिंता जताई कि खेत छिनने के बाद उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा और कम मुआवजे में वे दूसरी जमीन भी नहीं खरीद पाएंगे।

पुलिस प्रशासन का पक्ष:
इस पूरे मामले पर एसीपी कैंट (ACP Cantt) नितिन तनेजा ने बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का कार्यक्रम पहले से निर्धारित था। उसी दौरान कुछ किसानों ने मुआवजे को लेकर अनुचित तरीके से अपनी बात रखनी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के लिए समझाया, लेकिन कुछ लोग लगातार हंगामा करते रहे। उन्होंने कहा कि यदि कोई लिखित तहरीर प्राप्त होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com



#किसान #विरोध #वाराणसी #काशी_द्वार_योजना #मुआवजा #प्रेस_कॉन्फ्रेंस #केंद्रीय_मंत्री

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading