अलीगढ़: मतदाता सूची से फर्जी तरीके से नाम काटने का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश

रिपोर्टर: जेड ए खान

अलीगढ़ जिले के छर्रा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गांव मिर्जा चांदपुर में बड़ी संख्या में लोगों के नाम कथित तौर पर फर्जी तरीके से मतदान सूची से हटाए जाने के आरोप लगे हैं। इस घटना से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

A group of people gathered around a table, observing a discussion between two individuals. The scene takes place outdoors, with participants showing varying expressions of interest and concern.

गांव मिर्जा चांदपुर में सामने आया मामला:
छर्रा विधानसभा क्षेत्र के मिर्जा चांदपुर गांव में लगभग 150 मतदाताओं के नाम मतदान सूची से कटने की बात सामने आई है। आरोप है कि यह कार्रवाई नियमों के विपरीत और फर्जी तरीके से की गई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई और जब उन्होंने सूची देखी, तब उन्हें अपने नाम गायब मिले।

बीएलओ पर लगाए गए गंभीर आरोप:
इस पूरे प्रकरण में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की जिला अध्यक्ष लक्ष्मी धनगर ने आरोप लगाया कि बीएलओ की मिलीभगत से मतदाता सूची में गड़बड़ी की गई। उनका कहना है कि गांव के एक व्यक्ति राकेश कुमार के नाम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी हस्ताक्षर किए गए और एसआईआर फार्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में नाम कटवा दिए गए।

फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप:
ग्रामीणों और सपा नेताओं का दावा है कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें से कई लोग अनपढ़ हैं। इसके बावजूद उनके नाम पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं। इसे फर्जीवाड़े का अहम सबूत बताया जा रहा है। आरोप है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने आपत्ति दर्ज कराकर इन मतदाताओं के नाम कटवाए, जबकि संबंधित लोगों ने समय रहते अपने एसआईआर फार्म जमा कर दिए थे।

सपा नेताओं का प्रदर्शन:
मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया। सपा जिला अध्यक्ष लक्ष्मी धनगर कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के साथ अकराबाद थाना पहुंचीं और विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह लोकतंत्र के मूल अधिकारों पर हमला है और मतदाताओं को जानबूझकर उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश रची गई है। उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और सभी कटे हुए नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े जाएं।

ग्रामीणों में आक्रोश:
नाम कटने से प्रभावित ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से मतदान किया है और अचानक उनके नाम हट जाना समझ से परे है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इस घटना ने गांव में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।

पुलिस ने शुरू की जांच:
अकराबाद थाना प्रभारी प्रबल प्रताप ने बताया कि समाजवादी पार्टी की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठे सवाल:
इस घटना के बाद मतदाता सूची की पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।

निष्पक्ष जांच की मांग:
सपा नेताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए। साथ ही जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें जल्द से जल्द मतदाता सूची में शामिल किया जाए, ताकि उनका मतदान अधिकार सुरक्षित रह सके।



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