प्रदेश में पहली बार बाल एवं किशोर संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस प्रयास का उद्देश्य उन बच्चों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना है, जो किसी कारणवश सामान्य परिवेश से दूर हो जाते हैं। इसी मिशन के तहत महिला कल्याण विभाग, यूनिसेफ (UNICEF) और एससीईआरटी (SCERT) के सहयोग से ‘नवारम्भ’ नामक विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग के 46 चयनित शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण कौशल में प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे इन बच्चों को बेहतर दिशा प्रदान कर सकें।
नई पहल के तहत प्रशिक्षित होंगे शिक्षक:
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के निर्देशन में तैयार किए गए इस विशेष कार्यक्रम का लक्ष्य है कि संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चे भी अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ सकें। इस कार्यक्रम की अवधि 21 नवंबर तक तय की गई है, जिसमें शिक्षकों के लिए चार प्रमुख सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में आधुनिक शिक्षण तकनीक, बच्चों के मानसिक विकास और जीवन कौशल से जुड़े विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
अभिभावक की भूमिका निभाएंगे शिक्षक:
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी (Monika Rani) ने बताया कि संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी वहां नियुक्त शिक्षकों पर होती है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संवेदनशीलता, समझ और निरंतर प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। शिक्षकों को इस प्रशिक्षण के माध्यम से न केवल शैक्षिक तकनीकें सिखाई जाएंगी, बल्कि उन्हें यह भी बताया जाएगा कि कैसे इन बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाया जाए और कैसे उन्हें सामाजिक एवं मानसिक रूप से सक्षम बनाया जाए।
कॉनक्लेव ऑन जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन का शुभारम्भ:
किशोर न्याय समिति द्वारा आयोजित ‘Conclave on Justice for Children’ के अंतर्गत लखनऊ स्थित एससीईआरटी में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बच्चों की मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं, उनके सामाजिक परिवेश और शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों को विशेष ध्यान और भिन्न प्रकार की शिक्षण पद्धतियों की आवश्यकता होती है।
क्यों जरूरी है नवारम्भ:
नवारम्भ कार्यक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चे कई बार सामान्य माहौल से कट जाते हैं। इससे उनकी सीखने की क्षमता, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती पर असर पड़ता है।
इस पहल की प्रमुख आवश्यकता इस प्रकार समझी जा सकती है—
- संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चे सामाजिक वातावरण से दूर हो जाते हैं
- सीखने की गति और समझने की क्षमता अलग हो जाती है
- शिक्षक यदि विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करें तो वे बच्चों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को बेहतर समझ पाएंगे
- डिजिटल लर्निंग और जीवन कौशल भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे
इन विषयों पर दिया जा रहा है प्रशिक्षण:
नवारम्भ प्रशिक्षण मॉड्यूल में निम्न प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष फोकस रखा गया है—
- किशोर न्याय प्रणाली
- जुवेनाइल बच्चों की मानसिकता और चुनौतियां
- सीखने की बाधाएं
- समावेशी और त्वरित अधिगम
- बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण
- डिजिटल लर्निंग
- कंप्यूटेशनल थिंकिंग
- शिक्षक की भूमिका और प्रभावी शिक्षण रणनीतियां
इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चे नई ऊर्जा और उत्साह के साथ पढ़ाई में रुचि लेंगे और आगे चलकर समाज में अपनी पहचान मजबूती से स्थापित कर पाएंगे। नवारम्भ कार्यक्रम न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, बल्कि उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण भी है, जिन्हें अपने भविष्य को संवारने के लिए सही दिशा की आवश्यकता है।
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