Dubai: दुबई में रविवार को खेले गए एशिया कप के फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर नौवीं बार एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया। यह मुकाबला दोनों देशों के बीच हमेशा की तरह हाईवोल्टेज रहा, लेकिन भारतीय टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए विरोधियों को मात दी।
प्रधानमंत्री का संदेश: खेल के मैदान में “ऑपरेशन सिंदूर”
भारत की जीत के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “ऑपरेशन सिंदूर खेल के मैदान पर जारी है।” इस संदेश ने देशभर के क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह की लहर दौड़ा दी और भारतीय टीम के जुझारू प्रदर्शन की सराहना की।
अवॉर्ड सेरेमनी में विवाद
फाइनल मैच के बाद अवॉर्ड सेरेमनी में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी विजेता टीम को अवॉर्ड देने पहुंचे। हालांकि भारतीय टीम ने उनसे अवॉर्ड लेने से इनकार कर दिया। अवॉर्ड सेरेमनी के प्रेजेंटर साइमन डूल ने स्पष्ट किया कि भारतीय खिलाड़ी किसी भी अवॉर्ड को स्वीकार नहीं करेंगे।
मंच पर दुबई स्पोर्ट्स सिटी के खालिद अल जरूनी से ट्रॉफी लेने की बात हुई, लेकिन नकवी मंच से हटने को तैयार नहीं हुए। विवाद के चलते कार्यक्रम को जल्दी समाप्त करना पड़ा और नकवी ट्रॉफी व मेडल्स लेकर मंच से चले गए।
नकवी पाकिस्तान के गृहमंत्री हैं और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष भी हैं। भारतीय टीम ने यह कदम 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में उठाया था। टूर्नामेंट के दौरान भारत ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ भी नहीं मिलाया।
ट्रॉफी के बिना भी जश्न मनाया टीम इंडिया ने
अवॉर्ड नहीं मिलने के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने जीत का जश्न उत्साह और आत्मविश्वास के साथ मनाया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने साथी खिलाड़ियों के सामने खाली हाथ ऐसा जेस्चर किया मानो वे ट्रॉफी लेकर आ रहे हों। बाकी खिलाड़ी भी इसे ही असली ट्रॉफी मानकर जश्न में शामिल हुए।
भारतीय टीम के इस अंदाज ने दर्शकों को प्रेरित किया और साबित किया कि जीत केवल ट्रॉफी तक सीमित नहीं होती। मैदान पर टीम की एकजुटता और साहस हर किसी के लिए उदाहरण रहा।
भारत और पाकिस्तान की टीम अलग-थलग रही
न्यूज एजेसी PTI के अनुसार अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान नकवी जैसे ही प्रेजेंटेशन स्टेज पर आए, स्टैंड में बैठे भारतीय प्रशंसकों ने जोरदार “भारत माता की जय” के नारे लगाए। भारतीय टीम अवॉर्ड लेने नहीं गई, जिसके कारण स्टेज पर करीब एक घंटे तक कन्फ्यूजन बना रहा।
ग्राउंड पर भारतीय खिलाड़ी बैठे रहे, जबकि पाकिस्तानी टीम अलग-थलग खड़ी रही। यह पल दर्शाता है कि खेल का मैदान भले ही रोमांचक हो, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां भी कभी-कभी खेल से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।
अंत में
फाइनल मैच ने न केवल क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित किया, बल्कि खेल और राजनीति के बीच जटिल संबंधों को भी उजागर किया। भारतीय टीम ने अपनी खेल भावना और साहस से यह संदेश दिया कि जीत सिर्फ ट्रॉफी में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और एकजुटता में है।

