देवरिया: नहर सफाई न होने से गेहूं की फसल प्रभावित, किसान परेशान

रिपोर्टर: गुड़िया मद्धेशिया

देवरिया में रबी की फसल बो चुके किसान इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। गेहूं की फसल को इस समय सिंचाई की सख्त जरूरत है, लेकिन नहरों में पानी न होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं। हालात यह हैं कि जिले में नहरों के जरिए होने वाली सिंचाई लगभग ठप हो गई है। किसानों का कहना है कि समय पर पानी नहीं मिलने से गेहूं की बढ़वार रुक गई है और फसल पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। इस स्थिति ने किसानों की चिंता को और गहरा कर दिया है।

गेहूं की फसल को नहीं मिल पा रही सिंचाई:
किसानों के अनुसार इस समय गेहूं की फसल ऐसे चरण में है, जब नियमित सिंचाई बेहद जरूरी होती है। पानी की कमी के कारण खेतों की मिट्टी सूखती जा रही है और फसल कमजोर पड़ रही है। यदि जल्द ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो उत्पादन प्रभावित होना तय है। किसानों का कहना है कि निजी संसाधनों से सिंचाई कर पाना हर किसी के लिए संभव नहीं है, जिससे छोटे और मध्यम किसान सबसे अधिक परेशान हैं।

कृषि मंत्री का गृह जिला होने पर भी हालात खराब:
देवरिया (Deoria) प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही (Surya Pratap Shahi) का गृह जिला है, इसके बावजूद नहरों में पानी न छोड़े जाने से किसान नाराज हैं। किसानों का सवाल है कि जब कृषि मंत्री के जिले में यह स्थिति है, तो प्रदेश के अन्य जिलों में हालात कैसे होंगे। इस मुद्दे को लेकर किसानों में गहरा रोष देखा जा रहा है और वे इसे प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम बता रहे हैं।

नहर सफाई में गड़बड़ी का आरोप:
किसानों का आरोप है कि नहर विभाग हर साल नहर सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा करता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। नहरें कई स्थानों पर सिल्ट, मिट्टी और कचरे से भरी पड़ी हैं। कहीं-कहीं तो नहर पूरी तरह सील्ड अवस्था में है, जिससे पानी का बहाव संभव नहीं हो पा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर सही तरीके से सफाई होती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

लापरवाही और भ्रष्टाचार का दावा:
स्थानीय किसानों का कहना है कि नहर विभाग की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही है। नहरों की मरम्मत और सफाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है। किसानों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। खेतों में खड़ी फसल सूखने की कगार पर है और लागत निकलना भी मुश्किल हो सकता है।

आर्थिक नुकसान का डर:
यदि समय रहते नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो गेहूं की फसल बर्बाद होने की आशंका है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। बीज, खाद, दवा और जुताई पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है। पानी के अभाव में फसल खराब होने से किसानों पर कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।

प्रशासन से जांच की मांग:
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नहर विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि नहरों की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन होना चाहिए और केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर काम न चलाया जाए। साथ ही नहरों की तत्काल प्रभाव से साफ-सफाई कराकर उनमें पानी छोड़ा जाए, ताकि फसल को बचाया जा सके।

आंदोलन की चेतावनी:
किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि फसल और भविष्य दोनों दांव पर हैं, ऐसे में चुप बैठना संभव नहीं है। किसानों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है और स्थिति किसी भी समय गंभीर रूप ले सकती है।

अधिशासी अभियंता ने कैमरे पर बोलने से किया इनकार:
इस पूरे मामले पर जब नहर विभाग के अधिशासी अभियंता से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। अधिकारियों की चुप्पी ने किसानों के आरोपों को और बल दिया है। किसानों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी सामने आकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

बड़ा सवाल बना हुआ है:
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कृषि मंत्री के गृह जिले में नहरों में पानी नहीं है, तो प्रदेश के अन्य जिलों में किसानों की स्थिति कैसी होगी। यह मामला केवल देवरिया तक सीमित नहीं, बल्कि सिंचाई व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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