गाजीपुर: ददरी घाट पर स्नान के दौरान किशोर बहा, दो घंटे तक नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम
गाजीपुर (Ghazipur) शहर के ददरी घाट (Dadri Ghat) पर बुधवार सुबह गंगा स्नान के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। स्नान के लिए गंगा में उतरे तीन युवक अचानक गहरे पानी में चले गए। घाट पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दो युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन सदर कोतवाली (Sadar Kotwali) क्षेत्र के गौशाबाद (Gaushabad) निवासी अंकित बिंद, पुत्र राजेश बिंद, तेज बहाव में बह गया और लापता हो गया। घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
सुबह करीब छह बजे हुई इस घटना के बाद गंगा किनारे लोगों की भारी भीड़ जुट गई। परिजन और स्थानीय लोग लगातार किशोर की तलाश में गंगा की ओर टकटकी लगाए रहे। घाट का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया और हर कोई किशोर के सुरक्षित मिलने की उम्मीद में बचाव दल का इंतजार करता रहा।
घटना के बाद मची अफरा-तफरी:
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्नान के दौरान तीन युवक अचानक गहरे पानी में पहुंच गए। जैसे ही उन्हें डूबने का अहसास हुआ, घाट पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया और बचाव का प्रयास शुरू किया। स्थानीय लोगों की मदद से दो युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अंकित बिंद तेज धारा की चपेट में आ गया और देखते ही देखते लापता हो गया।
घटना के बाद परिजन बदहवास स्थिति में घाट पर पहुंचे। किसी की आंखों में आंसू थे तो कोई गंगा की लहरों में अपने बेटे की एक झलक तलाशता नजर आया। हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।
सूचना के बाद भी रेस्क्यू टीम पहुंचने में हुई देरी:
स्थानीय लोगों ने तत्काल डायल-112 को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और सदर कोतवाली (Sadar Kotwali) को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद किशोर की तलाश के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) को सूचना भेजी गई।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुबह छह बजे हादसा होने के बावजूद करीब आठ बजे तक कोई रेस्क्यू टीम मौके पर नहीं पहुंची थी। लोगों का कहना है कि डूबने जैसी घटनाओं में शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है और ऐसे में बचाव दल के पहुंचने में हुई देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न:
हादसे के बाद ददरी घाट (Dadri Ghat) सहित जिले के अन्य प्रमुख गंगा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर गहरे और खतरनाक पानी वाले क्षेत्रों का स्पष्ट चिन्हांकन नहीं किया गया है। इसके अलावा स्थायी लाइफगार्ड या प्रशिक्षित बचावकर्मियों की भी तैनाती नहीं है।
लोगों का यह भी कहना है कि कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा रस्सियों जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का अभाव है। नियमित निगरानी की प्रभावी व्यवस्था न होने के कारण श्रद्धालुओं को स्वयं ही सतर्क रहना पड़ता है।
त्योहारों तक सीमित रहती है व्यवस्था:
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि छठ, कार्तिक पूर्णिमा और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक दावे किए जाते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में घाटों पर ऐसी व्यवस्थाएं दिखाई नहीं देतीं। लोगों का मानना है कि यदि स्थायी रूप से सुरक्षा और बचाव संसाधन उपलब्ध हों तो इस प्रकार की घटनाओं में राहत एवं बचाव कार्य अधिक तेजी से किया जा सकता है।
स्थायी जल-रेस्क्यू व्यवस्था की उठी मांग:
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने गंगा घाटों पर स्थायी गोताखोरों और लाइफगार्ड की तैनाती की मांग उठाई है। इसके अलावा मोटरबोट और आवश्यक बचाव उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, गहरे पानी वाले क्षेत्रों का स्पष्ट चिन्हांकन करने, सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला स्तर पर त्वरित जल-रेस्क्यू यूनिट का गठन किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
हादसे ने छोड़े कई सवाल:
ददरी घाट (Dadri Ghat) पर अंकित बिंद के लापता होने की घटना केवल एक हादसा भर नहीं मानी जा रही, बल्कि यह घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को भी सामने लाती है। फिलहाल परिजन और स्थानीय लोग किशोर की तलाश जारी रहने की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं यह घटना घाटों पर सुरक्षा उपायों को लेकर प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर रही है।
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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी