गाज़ीपुर: मानक विहीन निर्माण पर ग्रामीणों का आक्रोश, भ्रष्टाचार उजागर

रिपोर्ट: ज़फ़र इक़बाल

गाजीपुर। जनपद के सदर ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चक अब्दुल बहाव (Chak Abdul Bahaw) गांव में इन दिनों विकास कार्यों की जगह भ्रष्टाचार और लापरवाही की चर्चा जोरों पर है। सरकार जहां गांव-गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर चल रही अनियमितताएं इन योजनाओं को धूमिल करती दिख रही हैं। गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसर में बन रहे आंगनवाड़ी भवन (Anganwadi Building) का निर्माण विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों ने घटिया निर्माण सामग्री और मानकविहीन कार्य का आरोप लगाते हुए निर्माण रोक दिया और जिम्मेदारों के खिलाफ आक्रोश जताया।

ग्रामीणों ने रोका निर्माण कार्य:
गांव के निवासियों का कहना है कि जिस भवन में गरीबों के बच्चों के पढ़ने-लिखने, पोषण और सुरक्षा की व्यवस्था की जानी थी, वही भवन मानकों की धज्जियां उड़ाकर बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य रोकते हुए प्रशासन को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कार्य में प्रयुक्त सीमेंट (Cement), बालू (Sand) और ईंट (Bricks) की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज की शिकायत:
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 (CM Helpline 1076) पर कॉल कर पूरी जानकारी सरकार तक पहुंचाई है। ग्रामीणों का कहना है कि “अगर यह बिल्डिंग गिर गई और किसी बच्चे की जान चली गई तो क्या प्रशासन जिम्मेदारी लेगा?” इस सवाल ने गांव में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निर्माण सामग्री में खुली अनियमितताएं:
जांच के दौरान ग्रामीणों ने पाया कि दीवारों में मसाले का अनुपात पूरी तरह गलत था। जहां आरसीसी (RCC) निर्माण में 1:4 का अनुपात होना चाहिए, वहां 1:8 और 1:15 तक का मिश्रण लगाया गया। यानी सीमेंट की मात्रा कम और बालू की मात्रा अधिक थी। साथ ही तीन नंबर की कमजोर ईंटें उपयोग की जा रही थीं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि “कोई देखने आए तो भी काम बंद मत करना।”

ठेकेदार और इंजीनियर गायब:
जब ग्रामीणों ने निर्माण की जिम्मेदारी पूछी तो न ठेकेदार मिला, न इंजीनियर। मजदूरों ने कहा कि उन्हें बस “जो सामग्री दी जाए, उसी से काम करने” के निर्देश हैं और ठेकेदार केवल फोन पर बात करता है। यह सुनकर ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार की परतों में लिपटा निर्माण बताया।

मीडिया के सामने बोले ग्रामीण:
ग्रामीणों ने मीडिया से कहा, “आप लोग आकर देखें, ईंट तक ठीक नहीं है, सीमेंट हाथ लगाने से झड़ जाता है। अगर यह भवन बारिश में गिर गया तो कौन जिम्मेदार होगा?” उन्होंने मांग की कि उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों — अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदार — के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।

पहले भी हो चुके हैं घटिया निर्माण:
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पहले भी नाली और शौचालय का निर्माण हुआ था जो कुछ ही समय में टूट गया। अब यह भवन भी उसी दिशा में बढ़ता दिख रहा है। गाजीपुर जैसे जनपदों में जहां सरकार विकास योजनाओं पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होती जा रही हैं।

जिम्मेदार अधिकारी ने दिया औपचारिक जवाब:
मीडिया द्वारा जानकारी लेने पर संबंधित अधिकारी ने कहा, “मामले की जानकारी मिली है। जांच के लिए टीम भेजी जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।” हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल औपचारिक जवाब है। जब तक मौके पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भ्रष्टाचार नहीं रुकेगा।

ठेकेदार संस्था पर उठे सवाल:
सूत्रों के अनुसार, आंगनवाड़ी भवन का निर्माण किसी पंजीकृत ठेकेदार संस्था के माध्यम से हो रहा है, लेकिन संस्था के प्रतिनिधि कभी साइट पर नहीं आते। मजदूरों को बिना सुरक्षा और बिना माप-तौल के कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह पूरा खेल “कागजों पर बिल बनाकर पैसा निकालने” का है, जबकि जमीन पर कुछ और ही हकीकत है।

जांच न हुई तो धरना देने की चेतावनी:
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि निर्माण कार्य को मानक के अनुसार नहीं कराया गया तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि यह केवल एक भवन का मामला नहीं बल्कि “ग्रामीण विकास की साख और सरकारी विश्वसनीयता” का प्रश्न है।

ग्रामीणों ने दिखाई जागरूकता:
गांव के बुद्धिजीवियों ने कहा कि हर बार विकास योजनाएं गांव तक आती हैं, लेकिन भ्रष्टाचार की दलदल में फंसकर दम तोड़ देती हैं। यह मामला साबित करता है कि जब तक प्रशासन मौके पर जाकर निगरानी नहीं करेगा, तब तक केवल भवन बनेंगे, भरोसा नहीं।

संदेश स्पष्ट है:
चक अब्दुल बहाव के ग्रामीणों ने जो कदम उठाया है, वह बताता है कि अब जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने लगी है। यह घटना प्रशासन के लिए सबक है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता की निगरानी अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो “मानक विहीन निर्माण” जैसी घटनाएं न केवल बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा होंगी बल्कि सरकारी योजनाओं की साख को भी मिट्टी में मिला देंगी।

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यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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