लखनऊ में सहकारी कर्मचारियों का प्रदर्शन, सालों से वेतन न मिलने पर उठी आवाज
लखनऊ में सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने पिछले कई दिनों से जारी अपनी एक सूत्री मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रशासन की ओर से अब तक कोई निर्णय नहीं लिए जाने के बाद कर्मचारियों ने सहकारिता भवन पहुंचकर राजकीय कोष से वेतन दिए जाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी आर्थिक परेशानियों और लंबे समय से लंबित वेतन का मुद्दा प्रमुखता से रखा।
राजकीय कोष से वेतन देने की उठी मांग:
सहकारी समितियों के कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से अपनी एक सूत्री मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के चलते कर्मचारियों ने सहकारिता भवन पर प्रदर्शन करते हुए राजकीय कोष से नियमित वेतन दिए जाने की मांग की।
संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी ने प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों की समस्याओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के कर्मचारियों को पिछले कई वर्षों से वेतन नहीं मिल पा रहा है। लंबे समय से वेतन लंबित होने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रदेश में करीब 7200 सहकारी समितियां:
शैलेंद्र तिवारी के मुताबिक, प्रदेश में करीब 7200 सहकारी समितियां हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसी समितियां हैं, जो अपने कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन देने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कई जिलों में कर्मचारियों का करोड़ों रुपये का वेतन बकाया है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। वेतन बकाया होने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानियां लगातार बनी हुई हैं।
किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने में भूमिका:
संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी ने कहा कि सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारी किसानों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। समितियों के माध्यम से किसानों को खाद, बीज और यूरिया उपलब्ध कराने के साथ उनकी उपज की खरीद में भी कर्मचारी भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़े इन कार्यों में योगदान देने के बावजूद सहकारी समितियों के कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए वेतन के संबंध में स्थायी व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री से नियमित वेतन की मांग:
शैलेंद्र तिवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि सहकारी समितियों के कर्मचारियों को राजकीय कोष से नियमित वेतन दिए जाने की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि इससे लंबे समय से वेतन की समस्या का सामना कर रहे कर्मचारियों को राहत मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के परिवार भी सम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें, इसके लिए उन्हें नियमित वेतन मिलना जरूरी है। इसी मांग को लेकर कर्मचारियों ने सहकारिता भवन पर प्रदर्शन किया और अपनी समस्या के समाधान की मांग उठाई।
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रिपोर्टर: संतोष कुमार