राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla), राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश, पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju), राज्यसभा में सदन के लीडर जेपी नड्डा (JP Nadda), लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi), राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और अनेक सांसदों ने संविधान दिवस पर एकजुट होकर प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया। यह वाचन संविधान की भावना, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
संसद में सामूहिक वाचन का आयोजन:
इस बार संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुख प्रतिनिधि एक ही मंच पर दिखाई दिए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में आयोजित इस सामूहिक वाचन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में प्रस्तावना को पढ़कर लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। इस दौरान सदन के वातावरण में गरिमा और संविधान के प्रति सम्मान का विशेष माहौल देखने को मिला।
लोकसभा और राज्यसभा के शीर्ष नेताओं की भागीदारी:
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla), राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश और पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया। इसके साथ ही राज्यसभा में सदन के लीडर जेपी नड्डा (JP Nadda) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भी संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रस्तावना का उच्च स्वर में पाठ किया। नेताओं की यह एकजुटता इस बात का प्रतीक बनी कि संविधान सर्वोपरि है और सभी राजनीतिक विचारधाराओं का साझा आधार भी।
प्रतिपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों का समान उत्साह:
राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने भी इस अवसर पर प्रस्तावना का पाठ करते हुए लोकतंत्र और समानता के मूल सिद्धांतों को सर्वोच्च बताया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं का एक मंच पर साथ होना संसद की लोकतांत्रिक परंपराओं को और मजबूती प्रदान करता है। संविधान दिवस के इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, संवैधानिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। यह सामूहिक वाचन सदन की एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरा।
लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान:
कार्यक्रम के दौरान मौजूद सांसदों ने भी इस बात पर जोर दिया कि संविधान भारत की आत्मा है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है। प्रस्तावना के सामूहिक पाठ ने एक बार फिर यह स्मरण कराया कि भारत की विविधता के बावजूद, संवैधानिक ढांचा हमें एक सूत्र में पिरोता है। नेताओं की सहभागिता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत करने का संदेश दिया।
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