लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) में स्थित मेडिकल कॉलेज (Medical College) के चिकित्सकों ने तत्परता और कुशलता का परिचय देते हुए तीन वर्षीय एक मासूम बच्चे की जान बचा ली। खेलते समय बच्चे ने गलती से पांच रुपये का सिक्का निगल लिया था, जो उसकी भोजन नली में जाकर फंस गया। घटना के बाद परिजन घबराकर बच्चे को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने समय रहते उपचार कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया।
खेलते समय निगल लिया था सिक्का:
जानकारी के अनुसार तीन वर्षीय बच्चा खेलते समय पांच रुपये का सिक्का मुंह में डालकर खेल रहा था। इसी दौरान सिक्का उसके गले से होते हुए भोजन नली में पहुंच गया और वहीं फंस गया। घटना के बाद बच्चे को परेशानी होने लगी, जिसके चलते परिजन उसे तुरंत मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति का परीक्षण किया और आवश्यक जांच कराने का निर्णय लिया। समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण चिकित्सकों को उपचार में आसानी हुई।
जांच में भोजन नली में फंसा मिला सिक्का:
चिकित्सकों द्वारा की गई एक्स-रे जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पांच रुपये का सिक्का भोजन नली के शुरुआती हिस्से में फंसा हुआ है। सिक्का फंसे रहने से बच्चे के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था, इसलिए चिकित्सकों ने बिना देर किए उपचार की प्रक्रिया शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को भी सक्रिय किया गया, ताकि बच्चे को सुरक्षित तरीके से राहत पहुंचाई जा सके।
एंडोस्कोपी तकनीक से निकाला गया सिक्का:
चिकित्सकों की टीम ने बच्चे का उपचार एंडोस्कोपी (Endoscopy) तकनीक के माध्यम से किया। इस प्रक्रिया में बिना किसी चीरे या टांके के भोजन नली में फंसे सिक्के को सावधानीपूर्वक बाहर निकाल लिया गया।
संपूर्ण प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई और बच्चे को किसी प्रकार की अतिरिक्त शल्य चिकित्सा की आवश्यकता नहीं पड़ी। चिकित्सकों की तत्परता और तकनीकी दक्षता के कारण उपचार सुरक्षित और प्रभावी साबित हुआ।
चिकित्सक ने दी उपचार की जानकारी:
ईएनटी विभाग (ENT Department) के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि बच्चे को सिक्का निगलने की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था। जांच के दौरान एक्स-रे में सिक्का भोजन नली में फंसा हुआ मिला। इसके बाद एंडोस्कोपी तकनीक का उपयोग करते हुए बिना किसी चीरे के सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
उन्होंने बताया कि उपचार के बाद बच्चे की स्थिति पूरी तरह सामान्य है और वह अब स्वस्थ एवं सुरक्षित है।
समय पर उपचार से टला बड़ा खतरा:
चिकित्सकों के अनुसार यदि ऐसी स्थिति में समय पर उपचार न मिले तो बच्चे के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इस मामले में परिजनों द्वारा बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाने और चिकित्सकों द्वारा शीघ्र उपचार शुरू करने से संभावित खतरा टल गया।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की इस सफलता की सराहना की जा रही है, जिन्होंने अपनी तत्परता और विशेषज्ञता से एक मासूम की जान सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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रिपोर्टर: हर्ष गुप्ता
