बुलंदशहर में पूर्व भाजपा ब्लॉक प्रमुख विनोद चौधरी (49) की हत्या उनके ही घर में कर दी गई। शव खून से लथपथ बेड पर पड़ा मिला। हत्या के समय विनोद घर में अकेले थे, क्योंकि उनकी पत्नी और बच्चे दिल्ली में रहते हैं। पड़ोसी ने सुबह देर तक उठने पर उन्हें न देख पाने के बाद खिड़की से झांककर देखा और पुलिस को सूचना दी।
मौके पर पहुंची पुलिस और जांच
एसएसपी दिनेश सिंह फोरेंसिक टीम के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने घर को सील कर सभी संभावित सबूतों की जांच शुरू कर दी है। मृतक की पहचान जाहिदपुर कला गांव निवासी विनोद चौधरी के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, हत्या में चाकू का इस्तेमाल किया गया और उसे बरामद कर लिया गया है। घर में मौजूद पिटबुल डॉग हत्या करने वाले पर हमला नहीं कर पाया, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कोई जान-पहचान वाला ही व्यक्ति हो सकता है।
पुरानी रंजिश और सुरक्षा की चेतावनी
विनोद चौधरी खुर्जा-जेवर क्षेत्र से पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। 15 साल पहले हत्या के मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी, लेकिन वह पैरोल पर बाहर थे। पुलिस का मानना है कि हत्या के पीछे पुरानी रंजिश हो सकती है।
विनोद के छोटे भाई सुधरी ने बताया कि 4-5 महीने पहले प्रॉपर्टी विवाद के चलते विनोद को धमकी मिली थी। दो महीने पहले उन्होंने जान का खतरा बताते हुए पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। घटना के समय घर का नौकर अंकित छुट्टी पर अपने घर गया हुआ था।
घटनास्थल से मिले सबूत
एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि घटना स्थल से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। विनोद हाल ही में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम कर रहे थे। पुलिस ने पांच टीमें गठित कर सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की जाँच शुरू कर दी है।
घटना के दौरान घर में अकेले रहने की वजह से यह संभावना जताई जा रही है कि हत्या का आरोपी किसी तरह विनोद को फंसाने या पुरानी रंजिश का हिसाब चुकता करने आया होगा।
पिछला मामला: उम्रकैद की सजा
विनोद चौधरी पर 2006 की एक हत्या का मामला दर्ज था। 1 नवंबर 2006 को बबलू नामक युवक की हत्या की गई थी। इसके चश्मदीद गवाह कर्मवीर ने आरोपी को देखा था। गवाह पर लगातार दबाव बनाया गया कि वह कोर्ट में गवाही न दे, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया।
10 अगस्त 2007 को कोर्ट में गवाही देने जा रहे कर्मवीर की रास्ते में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले की सुनवाई में 10 आरोपियों को दोषी पाया गया। 2022 में अपर सत्र न्यायालय ने सभी आरोपियों सहित विनोद चौधरी को उम्रकैद और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।
भाजपा सदस्यता और विवाद
16 फरवरी 2025 को विनोद चौधरी को भाजपा ने जिला स्तर पर सदस्यता दिलाई थी। इसके बाद उनकी हत्या के पुराने मामले की वजह से कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसके चलते भाजपा ने उनकी सदस्यता को निरस्त कर दिया।
इस मामले में पुलिस जांच तेज़ कर रही है और जल्द ही हत्या की पृष्ठभूमि और आरोपी की पहचान सामने आने की संभावना है।
पूर्व भाजपा ब्लॉक प्रमुख की हत्या, घर में मिला खून से लथपथ शव

