रिपोर्ट: मोहम्मद वसीम
बरेली (Bareilly) में 26 सितंबर के ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद के आठ दिन बाद पीड़ितों से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल (Delegation) को प्रशासन ने रोक दिया। दिल्ली से बरेली जा रहे सांसद हरेंद्र मलिक (Harendra Malik), इकरा हसन (Ikra Hasan) और मोहिबुल्लाह नदवी (Mohibullah Nadvi) को गाजियाबाद (Ghaziabad) बॉर्डर पर रोककर वापस दिल्ली भेज दिया गया। सांसद करीब 40 मिनट तक अड़े रहे, लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी।
इकरा हसन का आरोप:
सांसद इकरा हसन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अघोषित इमरजेंसी जैसी स्थिति बन गई है। उन्होंने सवाल उठाया, “कल कोई ‘आई लव महादेव’ या ‘आई लव श्रीराम’ लिखेगा तो किसी को आपत्ति नहीं होगी, तो ‘आई लव मोहम्मद’ में क्या गलत है?” इकरा ने कहा कि सपा का उद्देश्य केवल पीड़ितों से मिलकर उनकी पीड़ा को समझना और जनता की आवाज उठाना था, लेकिन प्रशासन सत्ता के दबाव में उन्हें रोक रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की भी मांग की।
माता प्रसाद हाउस अरेस्ट:
लखनऊ (Lucknow) में विपक्ष के नेता और सपा नेता माता प्रसाद पांडेय (Mata Prasad Pandey) को उनके घर पर हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इसी तरह संभल (Sambhal) सांसद जियाउर्रहमान बर्क (Ziaurrahman Burk) जब बरेली जाने निकले, तो इंस्पेक्टर राजीव कुमार मलिक (Inspector Rajiv Kumar Malik) उनके सामने खड़े हो गए। काफी देर तक सांसद जाने पर अड़े रहे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें घर से बाहर नहीं जाने दिया। बर्क ने कहा कि बरेली में जिनको गिरफ्तार किया गया, उनका क्या दोष है, अगर पुलिस के पास कोई सबूत है तो उसे मीडिया में पेश किया जाए।
बरेली में इंटरनेट और कानून-व्यवस्था:
बरेली में आज भी इंटरनेट बंद है। इस मामले में अब तक कुल 10 FIR दर्ज की गई हैं और 81 लोगों को जेल भेजा गया है। पुलिस के अनुसार 2,500 उपद्रवियों में से 200 को नामजद किया गया है। पुलिस ने बवाल की साजिश रचने का आरोप मौलाना तौकीर रजा (Maulana Tauqir Raza) पर लगाया है।
सांसदों की यात्रा रोकी गई:
दिल्ली से बरेली जा रहे मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) सांसद हरेंद्र मलिक, कैराना (Kairana) सांसद इकरा हसन और रामपुर (Rampur) सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को गाजियाबाद बॉर्डर पर रोक दिया गया। सांसदों का कहना है कि प्रशासन सत्ता के दबाव में काम कर रहा है और उन्हें केवल पीड़ितों से मिलने और उनकी पीड़ा समझने से रोक रहा है।
सपा नेताओं का विरोध:
लखनऊ में विपक्षी नेता माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि प्रशासन कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ रहा है। उन्होंने बताया कि बरेली में एक समुदाय बहुत डरा हुआ है और पुलिस-प्रशासन से भयभीत है, जबकि उनका दूसरे समुदाय से कोई झगड़ा नहीं है।
चंद्रशेखर आजाद हाउस अरेस्ट:
2 अक्टूबर को बरेली जा रहे नगीना (Nagina) सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) को भी हाउस अरेस्ट किया गया। उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर मेरे मुस्लिम भाइयों के साथ कोई नाइंसाफी नहीं हुई, तो मुझे वहां जाने से क्यों रोका जा रहा है।
बरेली बवाल और उसके बाद की घटनाओं ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कानून व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल खड़ा कर दिया है। सांसदों और विपक्षी नेताओं को रोकना, इंटरनेट बंद रखना और पीड़ितों से मिलने के रास्ते रोकना राज्य में संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी के संकेत माने जा रहे हैं।