गायत्री प्रजापति पर हमला: कैदी विश्वास का हिंसक इतिहास


उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति (Gayatri Prajapati) पर लखनऊ (Lucknow) की जेल में एक कैदी द्वारा किए गए हमले ने जेल सुरक्षा और कैदियों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हमला 30 सितंबर की रात को हुआ था, जिसमें प्रजापति गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावर कैदी हत्या के एक गंभीर मामले में जेल में बंद है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह हमला केवल इसलिए हुआ क्योंकि प्रजापति ने उसे एक छोटी सी बात पर टोक दिया था। कैदी ने इसी तरह की मामूली बात पर 3 साल पहले लखनऊ में एक युवक की निर्मम हत्या कर दी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कैदी विश्वास कुमार (Vishwas Kumar) में आक्रोश और हिंसा की प्रवृत्ति गहराई तक मौजूद है।

हमले का विवरण और मंत्री की चोटें:
30 सितंबर, 2025 की रात को लखनऊ जेल (Lucknow Jail) के अस्पताल में सफाई के काम के दौरान पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति और कैदी विश्वास के बीच तीखी बहस हुई। बताया जाता है कि प्रजापति ने कैदी को उसके काम के तरीके पर टोका, जिसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि दोनों में गाली-गलौज भी हुई। इसी गुस्से में आकर विश्वास ने कमरे की अलमारी की लोहे की पटरी से प्रजापति के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। इस अप्रत्याशित और क्रूर हमले से प्रजापति के सिर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें तत्काल केजीएमयू (KGMU) अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों ने उनके सिर में 13 टांके लगाए, साथ ही उनके हाथ और पैरों में भी चोटें आईं। जेल प्रशासन ने इस घटना को एक आकस्मिक (Accidental) घटना बताकर मामले को शांत करने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक (Political) और प्रशासनिक (Administrative) गलियारों में इस घटना ने गहरी हलचल पैदा कर दी है।

हत्या के आरोप में बंद है हमलावर कैदी:
हमलावर कैदी विश्वास कुमार (Vishwas Kumar) सआदतगंज (Saadatganj) हत्याकांड के मामले में जेल में बंद है। 27 मार्च, 2022 को मामूली कहासुनी के चलते विश्वास ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर सैयद हामिद अली (Syed Hamid Ali) नामक युवक पर धारदार हथियार से हमला किया था। शुरू में पुलिस ने यह मामला हत्या के प्रयास (धारा 307) के तहत दर्ज किया था, लेकिन घायल युवक की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद, इसे हत्या (धारा 302) के मामले में बदल दिया गया। पुलिस ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें विश्वास समेत चार आरोपियों को नामजद किया गया था। इस सनसनीखेज मामले की रिपोर्ट मृतक के भाई जमील अहमद (Jameel Ahmed) ने सआदतगंज थाने में दर्ज कराई थी। जमील अहमद ने अपनी तहरीर में बताया था कि पैसे की चोरी को लेकर आरोपी अजीज (Aziz) और उसके दोस्तों से पहले विवाद हुआ था, और इसी रंजिश के चलते विश्वास कुमार और उसके साथियों ने उनके भाई पर जानलेवा हमला किया। खून से लथपथ सैयद हामिद अली को पहले रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल (Rani Laxmibai Hospital), फिर बलरामपुर (Balrampur) और अंत में मेडिकल कॉलेज (Medical College) रेफर किया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

जमानत खारिज, जेल में दहशत:
हत्या के इस जघन्य अपराध में गिरफ्तारी के बाद से ही कैदी विश्वास कुमार जेल में बंद है। उसने 2024 में लखनऊ सीजेएम कोर्ट (Lucknow CJM Court) में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसकी दलीलों को अस्वीकार करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था। इस हत्या के मामले के बाद पूरे मोहल्ले में काफी दहशत फैल गई थी। विश्वास का यह पुराना हिंसक रिकॉर्ड इस बात को पुष्ट करता है कि उसका स्वभाव अत्यंत आक्रामक और खतरनाक है, जिसने अब जेल के अंदर पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर हमला कर एक नई घटना को अंजाम दिया है।

जेल प्रशासन ने नकारा साजिश का पहलू:
घटना के संबंध में डीआईजी जेल (DIG Jail) डॉ. राम धनी (Dr. Ram Dhani) ने मीडिया को बताया कि यह केवल कैदियों के बीच का एक आपसी विवाद था। उन्होंने किसी भी प्रकार की साजिश (Conspiracy) की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया। जेल प्रशासन ने हमलावर कैदी विश्वास पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है और मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। हालांकि, इतने संवेदनशील कैदी द्वारा पूर्व कैबिनेट मंत्री पर हमला करना जेल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। जेल प्रशासन का दावा है कि फिलहाल जेल के भीतर की स्थिति पूरी तरह से सामान्य और नियंत्रण में है।

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