रिपोर्ट: मोहम्मद वसीम
Bareilly: “आई लव मोहम्मद” विवाद के बाद शहर में प्रशासनिक कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में कोतवाली क्षेत्र स्थित पहलवान साहब की दरगाह के पीछे करीब तीन दर्जन दुकानों को नगर निगम ने सील कर दिया है। इस कार्रवाई में आईएमसी का कार्यालय भी शामिल है।
दुकानों का विवाद और दुकानदारों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों के अनुसार, इन दुकानों का निर्माण लगभग 30 वर्ष पूर्व हुआ था। दुकानदारों का कहना है कि यह संपत्ति वक्फ बोर्ड की है और इसका मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उनके अनुसार इस पर स्टे (स्थगन आदेश) भी चल रहा है। बावजूद इसके अचानक हुई कार्रवाई ने व्यापारियों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
दुकानदारों ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तो इस प्रकार की कार्रवाई कानूनन सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से वे वैधानिक रूप से किराया जमा कर रहे हैं और यही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है।
नगर निगम की कार्रवाई
नगर निगम की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में दुकानों पर ताले जड़ दिए। इस दौरान कई दुकानदार विरोध करते दिखे, लेकिन भारी सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें पीछे हटना पड़ा। प्रशासन ने कहा कि यह कार्रवाई वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर अवैध कब्जा रोकने और कानून के तहत की गई है।
बीडीए की सख्ती
साथ ही, बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भी बड़े स्तर पर सख्ती दिखाई। पीलीभीत बायपास रोड के बीसलपुर चौराहे के पास बने लॉन—आरिश लॉन, फ़हम लॉन, फ़्लोरा गार्डन और स्काई लॉर्क—को सील कर दिया गया। बीडीए के अनुसार, इन लॉनों का संचालन बिना निर्धारित मानकों और स्वीकृति के हो रहा था।
बीडीए ने बताया कि पहले इन संचालकों को नोटिस देकर नियमों का पालन करने का अवसर दिया गया था, लेकिन समयसीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज नहीं प्रस्तुत किए गए। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए इन्हें सील कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण और नियमों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की तैयारी
हालिया विवाद के बाद से शहर में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
कानूनी विकल्प और शहर की प्रतिक्रिया
प्रभावित दुकानदार और लॉन संचालक अब अपने कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध कब्जों पर रोक लगाने के लिए सही कदम मान रहे हैं, जबकि प्रभावित पक्ष इसे अपनी आजीविका पर सीधा हमला मान रहा है।
आने वाले दिनों में इस मामले पर न्यायालय का निर्णय आने वाला है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।