रिपोर्टर: अमित कुमार
उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में नगर के शहीद चौक स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘मनरेगा बचाओ पदयात्रा’ अभियान के तहत जोरदार प्रदर्शन किया। यह कार्यक्रम Indian National Congress (इंडियन नेशनल कांग्रेस) की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की गई और मनरेगा से जुड़े नए कानून को वापस लेने की मांग उठाई गई।
शहीद चौक पर जुटे कांग्रेस कार्यकर्ता:
बलिया (Ballia) नगर के शहीद चौक स्थित गांधी प्रतिमा स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने की। कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर मनरेगा बचाने का संकल्प दोहराया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया, जहां नेताओं ने क्रमवार अपनी बात रखी और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
नए कानून का विरोध, वापस लेने की मांग:
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा से संबंधित नया प्रावधान मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के हितों के विपरीत है। उनका आरोप था कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर और किसान वर्ग के हितों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ग्रामीण गरीबों के लिए सहारा है और इसे कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नेताओं का संबोधन और चेतावनी:
उमाशंकर पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस (Congress) पार्टी इस मुद्दे को लेकर निरंतर संघर्ष करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा को समाप्त करने या कमजोर करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का आह्वान किया।
कांग्रेस नेता सुधीर राय और सच्चिदानंद तिवारी ने भी सभा को संबोधित किया। दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा है। उनका कहना था कि यह योजना गांवों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है। उन्होंने मांग की कि सरकार मजदूर हितों को प्राथमिकता दे और मनरेगा से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार करे।
लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखने का संकल्प:
प्रदर्शन के दौरान मौजूद कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को रखा और कहा कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष मजदूरों और ग्रामीण परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। कार्यक्रम का समापन नारेबाजी और संगठनात्मक एकजुटता के संदेश के साथ हुआ।
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