रिपोर्टर: अमित कुमार
यूपी के बलिया (Ballia) जिले में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई उस समय बड़े टकराव में बदल गई, जब वर्षों से पोखरे की भूमि पर रह रहे गरीब परिवारों के घर तोड़े जाने लगे। खेजुरी थाना क्षेत्र के हथौज गांव में जैसे ही प्रशासनिक टीम ने अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की, वैसे ही इलाके में तनाव फैल गया। इस कार्रवाई से आक्रोशित ग्रामीणों ने राजस्व टीम और पुलिस बल का विरोध किया, जो कुछ ही देर में उग्र रूप ले बैठा। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने आ गए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई:
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह पूरी कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के आदेश के अनुपालन में की जा रही थी। गड़ही की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम हथौज गांव पहुंची थी। जैसे ही बुलडोजर से घर तोड़ने का कार्य शुरू हुआ, ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती चली गई। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।
ग्रामीणों और पुलिस के बीच टकराव:
बुलडोजर की कार्रवाई शुरू होते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम पर ईंट-पत्थरों से पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस बल ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ लगातार उग्र होती चली गई। काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच झड़प चलती रही, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को करीब 10 राउंड आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, इसके बावजूद भी ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
भारी पुलिस बल की तैनाती:
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर बुलाया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे इलाके को घेर लिया गया। इसके बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए अवैध रूप से बने घरों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें जमींदोज कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे गांव में तनाव का माहौल बना रहा और लोग अपने घर टूटते देख भावुक हो गए।
ग्रामीणों का दर्द और आरोप:
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से इसी जमीन पर रह रहे थे और मेहनत-मजदूरी व रिक्शा चलाकर बड़ी मुश्किल से अपने घर बनवाए थे। उनका आरोप है कि पूर्व प्रधान द्वारा पहले नोटिस जारी कराया गया और बाद में प्रशासन ने बुलडोजर से पूरे मकान तोड़ दिए। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि इस दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा उनके साथ मारपीट की गई, जिससे कई लोग घायल हो गए। लोगों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए अब कोई ठिकाना नहीं बचा है।
प्रशासन का पक्ष:
इस पूरे मामले में अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी दिनेश कुमार शुक्ल (Dinesh Kumar Shukla) ने बताया कि न्यायालय के आदेश के तहत राजस्व टीम और पुलिस ने अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने बहकावे में आकर राजस्व टीम और पुलिस पर पथराव किया, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई। लेखपाल की तहरीर के आधार पर पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
कानून-व्यवस्था बहाल रखने की कोशिश:
प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया गया और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं गांव में फिलहाल शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि दोबारा कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
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