लखनऊ | अयोध्या में रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का बुधवार को निधन हो गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय के अनुसार वह 87 वर्ष के थे, उन्होंने बुधवार सुबह 7 बजे लखनऊ PGI में आखिरी सांस ली। जानकारी के अनुसार 3 फरवरी को ब्रेन हेमरेज के बाद उनको अयोध्या से लखनऊ रेफर किया गया था, जहाँ उनका इलाज चल रहा था। 4 फरवरी को CM योगी ने PGI में सत्येंद्र दास से मुलाकात भी की थी।
आचार्य सत्येंद्र दास का पार्थिव शरीर को लखनऊ से अयोध्या लाया गया। बताया जा रहा है कि उनके आश्रम सत्य धाम गोपाल मंदिर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। सत्येंद्र दास पिछले 32 साल से रामजन्मभूमि में बतौर मुख्य पुजारी सेवा दे रहे थे। कहा जाता है कि 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी विध्वंस के समय वे रामलला को गोद में लेकर भागे थे।

सत्येंद्र दास का जन्म उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में 20 मई, 1945 में हुआ था। अयोध्या से इसकी दुरी 98 किमी है। वह अपने पिता के साथ अयोध्या घूमने जाते थे। वे बचपन से ही भक्ति भाव में रहते थे। अयोध्या में वो अपने पिता अभिराम दास जी के आश्रम में आते थे। अभिराम दास वही थे, जिन्होंने राम जन्मभूमि में 22-23 दिसंबर 1949 में गर्भगृह में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जी की मूर्तियों के प्रकट होने का दावा किया था। इन्हीं मूर्तियों के आधार पर आगे की लड़ाई भी लड़ी गई।
मूर्तियों के प्रकट होने के दावे और अभिराम दास जी की रामलला के प्रति सेवा और समर्पण देखकर सत्येंद्र दास बहुत प्रभावित हुए और उन्हीं के आश्रम में रहने के लिए उन्होंने संन्यास लेने का फैसला भी किया। सत्येंद्र दास ने 1958 में ही घर छोड़ दिया। उनके परिवार में दो भाई और एक बहन थीं। बहन का निधन हो चुका है। सत्येंद्र दास ने जब अपने पिता को संन्यास लेने का फैसला सुनाया था तो उनके पिता ने भी कोई आश्चर्य जाहिर नहीं किया बल्कि उन्होंने आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि मेरा एक बेटा घर संभालेगा और दूसरा रामलला की सेवा करेगा।

ये 1992 में ली गई उसी मंच की तस्वीर है, जहां से कारसेवा के लिए अनाउंसमेंट किया जाता था। तस्वीर में पुजारी सत्येंद्र दास के साथ VHP के अध्यक्ष अशोक सिंघल नज़र आ रहे हैं। 1992 में रामलला के पुजारी लालदास थे। उस समय रिसीवर की जिम्मेदारी रिटायर जज जेपी सिंह पर हुआ करती थी। फरवरी 1992 में जेपी सिंह के निधन के बाद राम जन्मभूमि की व्यवस्था का जिम्मा जिला प्रशासन को दिया गया। तब पुजारी लालदास को हटाने की बात हुई। उस समय तत्कालीन भाजपा सांसद विनय कटियार विहिप के नेताओं और कई संत के संपर्क में थे। सत्येंद्र दास का उनसे घनिष्ठ संबंध था। इसके बाद 1 मार्च 1992 को सत्येंद्र दास की नियुक्ति हो गई। उन्हें अधिकार मिला था कि वो 4 सहायक पुजारी भी रख सकते हैं। तब उन्होंने 4 सहायक पुजारियों को रखा था।
