लखनऊ (Lucknow) में चारबाग रेलवे स्टेशन (Charbagh Railway Station) पर आशा वर्कर्स ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन से संबद्ध आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (All India Central Council of Trade Union) के बैनर तले प्रदेश भर से आई आशा वर्कर्स ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी आशा वर्कर्स का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है, जिससे उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
भीषण ठंड के बीच उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के 75 जनपदों से आशा वर्कर्स चारबाग रेलवे स्टेशन पर एकत्र हुईं। सभी का इरादा स्टेशन से पैदल विधानसभा की ओर कूच करने का था, ताकि अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा सकें। हालांकि, उनके आगे बढ़ने से पहले ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए गए।
चारबाग स्टेशन पर पुलिस की सख्त घेराबंदी:
चारबाग रेलवे स्टेशन पर चार थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई। पुलिस ने चारों ओर से बैरिकेडिंग कर आशा वर्कर्स को वहीं रोक लिया। आशा वर्कर्स ने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने किसी को भी स्टेशन से बाहर निकलने नहीं दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
नारेबाजी से गूंजा स्टेशन परिसर:
पुलिस रोक के बावजूद आशा वर्कर्स ने अपना प्रदर्शन जारी रखा। स्टेशन परिसर लगातार नारों से गूंजता रहा। आशा वर्कर्स ने एक स्वर में नारा लगाया- “दो हजार में दम नहीं, बीस हजार से कम नहीं।” उनका कहना था कि मौजूदा मानदेय में परिवार चलाना और जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी करना संभव नहीं है।
स्टेशन पर धरने पर बैठीं आशा वर्कर्स:
आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद सभी आशा वर्कर्स चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में ही धरने पर बैठ गईं। ठंड के बावजूद वे वहीं डटी रहीं और लगातार नारेबाजी करती रहीं। प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स ने सरकार से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
आशा वर्कर्स की पांच सूत्रीय मांगें:
आशा वर्कर्स ने अपनी पांच प्रमुख मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा। इनमें पहली मांग 45/46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप राज्य स्वास्थ्यकर्मी का दर्जा देने की है, ताकि उन्हें न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश, ईएसआई, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और पेंशन की गारंटी मिल सके।
दूसरी मांग 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपये का जीवन बीमा सुनिश्चित करने की है।
तीसरी मांग आशा वर्कर्स के काम के घंटे तय किए जाने से जुड़ी है।
चौथी मांग 2017 से अब तक के लंबित भुगतानों का आकलन कर उनका भुगतान किए जाने की है।
पांचवीं मांग सेवानिवृत्ति के समय ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित करने की है।
कानपुर से आई आशा वर्कर ने रखी पीड़ा:
कानपुर (Kanpur) से आई आशा वर्कर नीतू दीक्षित ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि वे वर्ष 2006 से सेवा दे रही हैं। उन्होंने बताया कि इस भीषण ठंड में प्रदर्शन के लिए आना उनकी मजबूरी है। उनका कहना है कि वे पहले से ही सड़कों पर संघर्ष कर रही हैं और अब लखनऊ पहुंचकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं।
कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल:
नीतू दीक्षित ने कहा कि उन्हें मात्र 2000 रुपये वेतन मिलता है, जिसमें बच्चों का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। न तो वे बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं और न ही बीमारी के समय समय पर इलाज करवा पा रही हैं। उन्होंने कहा कि वे दूसरों के बच्चों के इलाज में दिन-रात लगी रहती हैं, लेकिन अपने बच्चों के लिए सुविधाएं जुटा पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है।
संघर्ष जारी रखने का ऐलान:
आशा वर्कर्स ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना उनका उद्देश्य है और वे पीछे हटने वाली नहीं हैं।
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