आज अनंत चतुर्दशी है, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, इतिहास और महत्व…

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला अनंत चतुर्दशी का पर्व इस साल 6 सितंबर, शनिवार को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विशेष अवसर है। साथ ही, गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव का समापन भी इसी दिन होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और गणेश जी की संयुक्त पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।




शुभ मुहूर्त और तिथि

चतुर्दशी तिथि आरंभ: 6 सितंबर को सुबह 3:15 बजे

चतुर्दशी तिथि समाप्त: 7 सितंबर को रात 1:42 बजे

पूजा का शुभ समय: सुबह 6:02 बजे से रात 1:41 बजे तक





पूजा विधि और अनंत सूत्र का महत्व

अनंत चतुर्दशी के दिन भक्त स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं, व्रत का संकल्प लेते हैं और भगवान विष्णु का ध्यान कर पूजा आरंभ करते हैं। पूजा में चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके साथ तांबे या पीतल का कलश, घी का दीपक, तुलसी दल, पुष्प, माला और भोग अर्पित किया जाता है।

इस व्रत में “अनंत सूत्र” धारण करना विशेष शुभ माना गया है। इसे कच्चे धागे में 14 गांठ लगाकर हल्दी और केसर से रंगा जाता है। पूजा के बाद इसे भगवान को अर्पित कर पुरुष दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में बांधते हैं। इसे बांधते समय भगवान विष्णु से रक्षा, सुख-समृद्धि और संकट निवारण की प्रार्थना की जाती है।




मंत्र जाप और व्रत कथा

पूजन के दौरान भक्त विष्णु सहस्रनाम, अनंत व्रत कथा और विशेष मंत्रों का जाप करते हैं। विष्णु मूल मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” और विष्णु गायत्री मंत्र “ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्” के जप से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।




अनंत चतुर्दशी का इतिहास

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत महाभारत काल से मानी जाती है। कथा के अनुसार, पांडवों के जीवन में कठिन समय आने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने का निर्देश दिया था। व्रत करने से उनके जीवन में पुनः सुख-समृद्धि लौट आई। इसी कारण से यह पर्व संकट निवारण और परिवारिक सुख-शांति के लिए विशेष महत्व रखता है।




धार्मिक महत्व

अनंत चतुर्दशी न केवल भगवान विष्णु की आराधना का पर्व है, बल्कि इस दिन गणपति विसर्जन के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन भी होता है। इसे भगवान विष्णु की अनंत शक्ति, आशीर्वाद और कल्याणकारी स्वरूप की उपासना का दिन माना जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धापूर्वक यह व्रत करते हैं, उनके जीवन से दुख और दरिद्रता समाप्त होती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और ईश्वरीय कृपा सदैव बनी रहती है।




📌 ध्यान देने योग्य:

यह पर्व परिवारिक उन्नति, धन, संतान सुख और जीवन में स्थिरता की कामना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा जीवन की बाधाओं को दूर कर नई ऊर्जा प्रदान करती है।

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