रिपोर्टर: जेड ए खान
अलीगढ़ (Aligarh) में वर्ष 2007 के बहुचर्चित AMU छात्रसंघ चुनाव के दौरान हुए छात्र हत्याकांड में अदालत का अहम फैसला सामने आया है। इस मामले में कोर्ट ने तीन हत्यारोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत के इस फैसले को छात्र राजनीति से जुड़े गंभीर अपराधों के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
AMU छात्रसंघ चुनाव से जुड़ा था मामला:
यह मामला अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) के छात्रसंघ चुनाव से जुड़ी रंजिश का था। ओडिशा (Odisha) निवासी AMU छात्र मुल्ला मोहम्मद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई थी, जब छात्रसंघ चुनाव को लेकर परिसर में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था। चुनावी प्रतिद्वंद्विता के चलते यह वारदात सामने आई, जिसने पूरे विश्वविद्यालय और शहर को झकझोर दिया था।
हबीब हॉल के सामने हुई थी वारदात:
जानकारी के अनुसार, यह हत्या AMU के हबीब हॉल (Habib Hall) के सामने हुई थी। घटना के समय मुल्ला मोहम्मद चाय की एक टपरी पर चाय पी रहे थे। तभी हमलावरों ने उन पर गोली चला दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। यह इलाका सिविल लाइन थाना (Civil Lines Police Station) क्षेत्र में आता है। घटना के बाद पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी और हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे।
8 अप्रैल 2007 की रात को हुआ था हत्याकांड:
यह बहुचर्चित छात्र हत्याकांड 8 अप्रैल सन 2007 की रात को हुआ था। उस समय AMU परिसर में छात्रसंघ चुनाव को लेकर माहौल गर्म था। इस घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। लंबे समय तक चले ट्रायल के बाद अब जाकर अदालत ने इस पर अंतिम फैसला सुनाया है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाया फैसला:
इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट कोर्ट द्वितीय तारकेश्वरी सिंह (Tarkeshwari Singh) की अदालत में हुई। कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
शासकीय अधिवक्ता ने दी जानकारी:
इस पूरे मामले की जानकारी शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार (Kuldeep Kumar) ने दी। उन्होंने बताया कि अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट माना कि हत्या की वारदात सुनियोजित थी और चुनावी रंजिश के चलते इसे अंजाम दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों और तथ्यों को अदालत ने विश्वसनीय माना।
छात्र राजनीति पर फिर उठा सवाल:
इस फैसले के बाद एक बार फिर छात्र राजनीति में हिंसा के मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है। AMU जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में हुई इस घटना ने उस समय पूरे देश का ध्यान खींचा था। अदालत के फैसले को न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
पीड़ित परिवार को मिला न्याय का भरोसा:
करीब 19 वर्षों बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। लंबे समय तक चले मुकदमे के बाद अदालत के निर्णय ने यह संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों में कानून अपना काम जरूर करता है, भले ही उसमें समय लगे।
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