रिपोर्टर: जेड ए खान
अलीगढ़ (Aligarh) स्थित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) के विधि विभाग में परीक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। लॉ फैकल्टी स्टाफ द्वारा विधि छात्रों को पिछले शैक्षणिक सत्र 2024-2025 का प्रश्नपत्र थमा दिया गया, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। इस गलती का असर सीधे छात्रों पर पड़ा और दस दिन बाद जब उक्त प्रश्नपत्र को रद्द करने का नोटिस जारी हुआ, तो छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिला। स्थिति इतनी बिगड़ी कि छात्रों ने हंगामा करते हुए विभागीय कार्यालय का घेराव कर दिया।
गलत प्रश्नपत्र वितरण से शुरू हुआ विवाद:
जानकारी के अनुसार बीएएलएलबी (BALLB) प्रथम वर्ष की लीगल मैथर्ड विषय की परीक्षा 4 दिसंबर को कराई गई थी। परीक्षा के दौरान छात्रों को जो प्रश्नपत्र दिया गया, वह पिछले वर्ष 2024-2025 का बताया जा रहा है। परीक्षा संपन्न होने के बाद छात्रों ने इसे सामान्य मानते हुए उत्तर पुस्तिकाएं जमा कर दीं, लेकिन बाद में विभागीय स्तर पर हुई जांच में यह गंभीर चूक सामने आई। इस लापरवाही ने न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि छात्रों की मेहनत पर भी संकट खड़ा कर दिया।
दस दिन बाद जारी हुआ पेपर रद्द का नोटिस:
परीक्षा के करीब दस दिन बाद 13 दिसंबर को एएमयू (AMU) विधि विभाग की ओर से पेपर कैंसिलेशन का नोटिस जारी किया गया। नोटिस में छात्रों को सूचित किया गया कि 4 दिसंबर को हुआ लीगल मैथर्ड का पेपर निरस्त किया जाता है और इसकी पुनः परीक्षा 22 दिसंबर को कराई जाएगी। जैसे ही यह सूचना छात्रों तक पहुंची, उनमें असंतोष फैल गया। छात्रों का कहना है कि गलती विभागीय स्तर पर हुई है, ऐसे में इसका खामियाजा उनसे दोबारा परीक्षा लेकर क्यों वसूला जा रहा है।
22 दिसंबर की पुनः परीक्षा का छात्रों ने किया विरोध:
विधि विभाग द्वारा 22 दिसंबर को रद्द हुए पेपर की दोबारा परीक्षा कराने की तिथि घोषित किए जाने के बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया। छात्रों ने साफ शब्दों में कहा कि वे वही पेपर दोबारा नहीं देंगे, जो पहले ही उनसे कराया जा चुका है। उनका तर्क है कि प्रश्नपत्र वितरण से लेकर परीक्षा आयोजन तक पूरी जिम्मेदारी विभाग की थी, ऐसे में छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डालना अनुचित है।
डीन कार्यालय का घेराव, जमकर हुआ हंगामा:
आक्रोशित विधि छात्रों ने विधि विभाग के डीन कार्यालय का घेराव किया और जमकर हंगामा किया। छात्रों ने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए। छात्रों का कहना था कि इस तरह की लापरवाही से न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि विश्वविद्यालय की छवि भी धूमिल होती है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लिखित रूप में भी रखने की बात कही।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं:
छात्रों का कहना है कि 4 दिसंबर को कराई गई परीक्षा को ही मान्य माना जाए और दोबारा परीक्षा का निर्णय वापस लिया जाए। साथ ही, भविष्य में इस तरह की चूक न हो, इसके लिए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए। छात्रों ने यह भी कहा कि यदि विभागीय गलती साबित हो चुकी है, तो उसके लिए छात्रों को परेशान करना न्यायसंगत नहीं है।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर उठे सवाल:
इस पूरे मामले ने एएमयू (AMU) के विधि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा जैसे संवेदनशील विषय में हुई इस गलती से छात्रों का भरोसा डगमगाया है। छात्रों का कहना है कि समय पर सही निर्णय न लिए जाने से स्थिति और बिगड़ी, जिसका परिणाम विरोध और हंगामे के रूप में सामने आया।
मामले पर आगे की स्थिति पर नजर:
फिलहाल यह मामला अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) के विधि विभाग से जुड़ा हुआ है और छात्र अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। 22 दिसंबर को प्रस्तावित पुनः परीक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। छात्र चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द कोई ठोस और न्यायसंगत निर्णय ले, जिससे उनका भविष्य प्रभावित न हो।
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