नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए गए विशेष इंटरव्यू में विपक्ष पर करारा हमला बोला। उन्होंने हाल ही में संसद में पेश किए गए तीनों विधेयकों, विपक्ष के विरोध, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे और अपने राजनीतिक जीवन से जुड़े अनुभवों पर खुलकर बातचीत की। शाह ने साफ कहा कि विपक्ष लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
जेल से सत्ता चलाने की राजनीति पर निशाना
शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनकी मंशा ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसमें अगर नेता जेल चला जाए तो वहीं से सरकार चला सके। “ये लोग चाहते हैं कि जेल को ही मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का आवास बना दिया जाए। वहां से ही DGP, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव और गृह सचिव को आदेश दिए जाएं। क्या ये लोकतंत्र के लिए सही है?” शाह ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यदि किसी नेता को जेल जाना पड़े, तो बहुमत वाले दल का कोई अन्य नेता शासन संभाल सकता है।
राहुल गांधी और अध्यादेश का मुद्दा
इंटरव्यू के दौरान शाह ने 2013 की उस घटना को भी याद दिलाया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था। शाह ने कहा, “उस समय राहुल गांधी ने लालू यादव को बचाने वाले अध्यादेश को फाड़ दिया था और कहा था कि यह नैतिकता के खिलाफ है। अगर उस समय नैतिकता थी तो आज क्यों नहीं है, जबकि कांग्रेस लगातार तीन चुनाव हार चुकी है।”
धनखड़ के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर शाह ने कहा कि धनखड़ ने अपने कार्यकाल में संविधान के अनुरूप उत्कृष्ट कार्य किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि धनखड़ का इस्तीफा पूरी तरह से व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों से हुआ है।
संसद सुरक्षा और CISF तैनाती
संसद में CISF की तैनाती को लेकर विपक्ष के आरोपों पर शाह ने कहा कि यह कदम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि सुरक्षा कारणों से उठाया गया है। उन्होंने कहा, “मार्शल केवल तभी सदन में प्रवेश करते हैं, जब अध्यक्ष उन्हें आदेश देते हैं। विपक्ष बहाने ढूंढ रहा है और जनता में भ्रम पैदा करना चाहता है। तीन चुनाव लगातार हारने के बाद उनकी हताशा बढ़ गई है।”
विपक्षी उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर सवाल
INDIA गठबंधन द्वारा सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर शाह ने कहा कि रेड्डी ने सलवा जुडूम जैसी पहल को खारिज कर दिया था, जिससे आदिवासियों के आत्मरक्षा अधिकार खत्म हुए और नक्सलवाद दो दशकों तक मजबूत रहा। शाह ने कहा कि विपक्ष की पसंद का मानदंड केवल वामपंथी विचारधारा रही है।
अपनी गिरफ्तारी और इस्तीफे का उदाहरण
इंटरव्यू में शाह ने अपने राजनीतिक करियर की एक अहम घटना का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि जब उनके खिलाफ आरोप लगे और CBI ने उन्हें समन भेजा तो उन्होंने तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दिया। “मुझे 96वें दिन बेल मिल गई थी, लेकिन मैंने तब तक मंत्री पद की शपथ नहीं ली, जब तक मेरे ऊपर लगे सभी आरोप पूरी तरह से खारिज नहीं हो गए। अदालत ने साफ कहा था कि यह मामला राजनीतिक बदले की कार्रवाई था और मेरा इससे कोई संबंध नहीं था।”
अमित शाह ने इस इंटरव्यू में विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उनकी राजनीति लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने साफ संदेश दिया कि सत्ता चलाने का अधिकार जनता के जनादेश से चुने गए दल को है, न कि जेल में बैठे किसी नेता को।