रिपोर्टर: जेड ए खान
अलीगढ़ शहर में एक बार फिर ट्रैफिक व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। थाना क्वार्सी (Quarsi) क्षेत्र के किशनपुर तिराहे पर लगे भीषण जाम के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राहगीरों से लेकर सोशल मीडिया तक लोगों को झकझोर कर रख दिया। जाम में फंसी एक एंबुलेंस में गंभीर हालत का मरीज तड़पता रहा, सायरन लगातार बजता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस कर्मी संवेदनशीलता दिखाने के बजाय चालान काटने में व्यस्त नजर आए। यह पूरी घटना गुरुवार दोपहर करीब 3:30 बजे की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
किशनपुर तिराहे पर रोजाना लगने वाला जाम:
किशनपुर तिराहा अलीगढ़ (Aligarh) के व्यस्त इलाकों में गिना जाता है, जहां दिन के समय अक्सर वाहनों का दबाव बना रहता है। गुरुवार को भी हालात कुछ ऐसे ही थे। दोपहर होते-होते यहां वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और देखते ही देखते पूरा इलाका जाम की चपेट में आ गया। इसी दौरान एक एंबुलेंस मरीज को लेकर वहां पहुंची, लेकिन जाम में फंसकर रह गई।
सायरन बजता रहा, रास्ता नहीं मिला:
एंबुलेंस चालक लगातार सायरन बजाकर रास्ता देने की अपील करता रहा। एंबुलेंस में मौजूद मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है और हर मिनट उसके लिए बेहद अहम था। इसके बावजूद आसपास मौजूद वाहन टस से मस नहीं हुए और पुलिस की ओर से भी एंबुलेंस को प्राथमिकता देकर निकालने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।
मौके पर मौजूद दरोगा की भूमिका पर सवाल:
घटना के दौरान किशनपुर तिराहे पर पुलिस की मौजूदगी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, वहां मौजूद दरोगा ने न तो जाम को खुलवाने की कोशिश की और न ही एंबुलेंस को निकलवाने के लिए सक्रियता दिखाई। उल्टा, वह सड़क किनारे खड़े होकर वाहनों के चालान काटते नजर आए। यह दृश्य वहां मौजूद राहगीरों को खटक गया।
राहगीर ने बनाया वीडियो, हुआ वायरल:
पुलिस की इस कथित उदासीनता को देखकर एक राहगीर ने अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बना लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एंबुलेंस जाम में फंसी है, सायरन बज रहा है और मरीज को लेकर अफरा-तफरी का माहौल है, जबकि पुलिस कर्मी दूसरी ओर चालान की कार्रवाई में व्यस्त हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।
सोशल मीडिया पर उठे तीखे सवाल:
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब एंबुलेंस जैसी आपात सेवा को रास्ता नहीं दिया जा रहा, तो आम जनता की सुरक्षा और संवेदनशीलता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। कुछ यूजर्स ने इसे अमानवीय रवैया बताया, तो कुछ ने ट्रैफिक पुलिस की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।
पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी:
यह घटना न केवल ट्रैफिक व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि आपात स्थितियों में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े करती है। एंबुलेंस को तत्काल रास्ता देना न केवल नैतिक जिम्मेदारी है, बल्कि कानून और मानवीय मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। जाम के दौरान ऐसे मामलों में त्वरित निर्णय और सक्रियता बेहद जरूरी होती है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश:
किशनपुर और आसपास के इलाकों के लोगों का कहना है कि यहां जाम की समस्या रोज की बात हो गई है, लेकिन आपात स्थितियों में भी अगर यही रवैया रहा, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। लोगों ने मांग की है कि इस मामले की जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
वायरल वीडियो से प्रशासन पर दबाव:
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस घटना का संज्ञान लेगा और एंबुलेंस जैसी आपात सेवाओं के लिए स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे, ताकि किसी मरीज की जान जाम और लापरवाही की भेंट न चढ़े।
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