कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट चुके अमरमणि त्रिपाठी ने करीब 20 साल बाद सार्वजनिक रूप से सामने आकर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। महराजगंज के आनंदनगर स्थित कृष्णा मैरिज हॉल में रविवार शाम आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वह फरेंदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी के नौतनवा से चुनाव लड़ने की बात कही। हालांकि, अमरमणि ने किसी राजनीतिक दल से टिकट मिलने या किसी दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
अमरमणि के सार्वजनिक कार्यक्रम में पहुंचने के बाद महराजगंज की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। मंच पर उनकी मौजूदगी के दौरान समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम में पूर्व विकलांग एवं राज्य मंत्री श्याम नारायण तिवारी भी मौजूद रहे।
फरेंदा से चुनाव लड़ने का किया ऐलान:
जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान अमरमणि त्रिपाठी ने अपने पुराने राजनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए फरेंदा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि 2027 में वह फरेंदा से चुनाव मैदान में उतरेंगे। साथ ही उन्होंने अपने बेटे अमनमणि त्रिपाठी के नौतनवा से चुनाव लड़ने की बात कही और राजनीतिक मुकाबले को लेकर चुनौतीपूर्ण अंदाज में अपनी बात रखी।
अमरमणि ने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से जनता के बीच रहकर राजनीति करता आया है। उनके मुताबिक, जनता के साथ परिवार का रिश्ता केवल चुनाव के समय तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि आगे भी लोगों के बीच रहकर उनके सुख-दुख में साथ खड़े रहेंगे।
युवाओं के आंदोलनों का भी किया जिक्र:
कार्यक्रम में अमरमणि त्रिपाठी ने युवाओं की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युवाओं ने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में सरकारें बदल दीं। उन्होंने भारत में युवाओं के दबाव का जिक्र करते हुए केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात भी कही।
अमरमणि की लंबे समय बाद सार्वजनिक मौजूदगी और उनके चुनाव लड़ने के ऐलान को लेकर कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों के बीच उत्साह दिखाई दिया। उनके बयान के बाद महराजगंज की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अमनमणि ने पिता के लिए मांगा समर्थन:
नौतनवा के पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने भी कार्यक्रम में अपने पिता अमरमणि त्रिपाठी के समर्थन में लोगों से अपील की। उन्होंने फरेंदा विधानसभा सीट से अपने पिता को विजयी बनाने की बात कही।
अमनमणि ने कांग्रेस के मौजूदा विधायक वीरेंद्र चौधरी पर भी राजनीतिक तंज कसा। उन्होंने कहा कि कई बार चुनाव लड़ने के बाद इस बार जनता की सहानुभूति से उन्हें जीत मिली।
अमनमणि ने पूर्व भाजपा विधायक बजरंग बहादुर सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने गिट्टी चोरी और ठेकेदारी के जरिए हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे लोगों पर लगाम लगाने की जरूरत है। हालांकि, ये आरोप अमनमणि के बयान के तौर पर ही सामने आए हैं।
किसी दल के टिकट की घोषणा नहीं:
अमरमणि त्रिपाठी ने फरेंदा से चुनाव लड़ने की घोषणा तो की है, लेकिन उन्होंने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किस राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। उनके किसी दल से टिकट को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई है।
हालांकि, उनकी राजनीतिक सक्रियता की चर्चा पहले से ही शुरू हो गई थी। हाल में नौतनवा में एक निजी अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान उनके समर्थकों ने ‘अमरमणि त्रिपाठी जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे। इसके बाद उनके चुनाव लड़ने को लेकर अटकलें तेज हुई थीं।
उम्रकैद के बाद चली गई थी विधायकी:
अमरमणि त्रिपाठी का राजनीतिक जीवन मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के बाद कानूनी विवादों से भी जुड़ा रहा है। 2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें महराजगंज की नौतनवा सीट से प्रत्याशी बनाया।
अमरमणि ने जेल में रहते हुए चुनाव जीता था। हालांकि, इसके कुछ ही महीनों बाद 24 अक्टूबर 2007 को देहरादून की विशेष अदालत ने मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के बाद उनकी विधायकी भी चली गई।
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। करीब 20 साल जेल में रहने के बाद दोनों वर्ष 2023 में रिहा हुए थे।
इलाज के नाम पर अस्पताल में रहे:
अमरमणि त्रिपाठी को शुरुआत में हरिद्वार की रौशनाबाद जेल में रखा गया था, जहां उनकी पत्नी मधुमणि भी बंद थीं। बाद में वर्ष 2012 तक दोनों को गोरखपुर जेल स्थानांतरित कर दिया गया।
इसके बाद 13 फरवरी 2013 को अमरमणि इलाज के लिए गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इसके बाद करीब 10 साल तक उनका इलाज अस्पताल में चलता रहा। अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के कमरा नंबर 16 में उनके रहने की व्यवस्था रही और बाहर पुलिस का पहरा रहता था।
अस्पताल से भी सक्रिय रही राजनीतिक भूमिका:
अमरमणि लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बावजूद अपनी पुश्तैनी राजनीतिक सीट नौतनवा से जुड़े रहे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में रहते हुए भी उन्होंने अपने बेटे अमनमणि त्रिपाठी की राजनीतिक गतिविधियों को मजबूत करने में भूमिका निभाई।
वर्ष 2017 में अमनमणि त्रिपाठी निर्दलीय विधायक बने। अब अमरमणि के 2027 में फरेंदा से चुनाव लड़ने के ऐलान और अमनमणि के नौतनवा से चुनाव लड़ने की बात के बाद महराजगंज की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है।
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