उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh) जिले से जुड़ा एक मामला लंबे समय बाद राहत की खबर लेकर सामने आया है। सोशल मीडिया पर शुरू हुआ प्रेम एक युवक के लिए मुश्किलों का कारण बन गया, लेकिन अब सजा पूरी होने के बाद उसके भारत लौटने की उम्मीद जगी है। अलीगढ़ के बरला (Barla) क्षेत्र के रहने वाले बादल बाबू के पिता कृपाल सिंह का कहना है कि बेटे की वापसी की खबर ने पूरे परिवार में नई उम्मीद जगा दी है और सभी बेसब्री से उसके लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
परिवार को मिली बेटे की रिहाई की सूचना:
कृपाल सिंह ने बताया कि उन्हें बेटे के भारत लौटने की जानकारी उनके वकील के माध्यम से मिली। यह सूचना मिलते ही परिवार में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पिता का कहना है कि उन्होंने लगभग उम्मीद खो दी थी कि बेटा कभी वापस आएगा, लेकिन अब जब उसके डिटेंशन सेंटर में रखे जाने और रिहाई की औपचारिकताओं की जानकारी मिली है, तो मन को सुकून मिला है। परिवार ने भारत सरकार से अपील की है कि पाकिस्तान सरकार से बातचीत कर बेटे की जल्द वापसी सुनिश्चित की जाए।
फेसबुक से शुरू हुई कहानी:
बादल बाबू अलीगढ़ के बरला क्षेत्र के गांव खिटकारी का निवासी है। वह दिल्ली में रहकर सिलाई का काम करता था। करीब एक साल पहले फेसबुक के माध्यम से उसकी दोस्ती पाकिस्तान की सना रानी से हुई। बातचीत बढ़ने के साथ दोनों ने मोबाइल नंबर साझा किए और धीरे-धीरे यह दोस्ती प्रेम में बदल गई। लगातार संपर्क में रहने के कारण बादल भावनात्मक रूप से इस रिश्ते में बंधता चला गया।
बिना वीजा पाकिस्तान पहुंचा युवक:
पिता कृपाल सिंह के अनुसार, सितंबर 2024 में बादल ने परिजनों को बिना बताए पासपोर्ट और वीजा के बिना ही अवैध रूप से पाकिस्तान जाने का फैसला कर लिया। वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित मंडी बहाउद्दीन जिले के माउंग गांव पहुंचा, जहां सना रानी रहती थी। वहां पहुंचकर उसकी सना से मुलाकात हुई और उसने पत्नी गायत्री देवी को वीडियो कॉल कर बताया कि वह जिस मकसद से घर से निकला था, वह पूरा हो गया है।
दो दिन में बदला हालात:
हालांकि यह मुलाकात ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। बादल दो दिन तक सना के घर रहा, लेकिन इसके बाद सना और उसकी मां ने उसे भारत लौटने की सलाह देते हुए घर से बाहर कर दिया। इसके बाद बादल वहीं मंडी बहाउद्दीन इलाके में हाजी असगर अली के यहां पशुओं की देखरेख का काम करने लगा। उसकी भाषा और बातचीत से स्थानीय लोगों को उस पर शक हुआ, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
पाकिस्तान पुलिस ने किया गिरफ्तार:
सूचना मिलने पर मंडी बहाउद्दीन के सदर थाने की पुलिस ने 27 दिसंबर 2024 को बादल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसके भारत का नागरिक होने और अवैध रूप से सीमा पार करने की बात सामने आई। इसके बाद उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया और मामला अदालत में चला।
कोर्ट से मिली सजा:
कोर्ट में ट्रायल के बाद 13 मई 2025 को बादल को एक साल की सजा सुनाई गई। हालांकि, वह पहले ही करीब चार महीने दस दिन जेल में बिता चुका था, इसलिए उसकी रिहाई की तारीख 26 दिसंबर तय की गई। सजा पूरी होने के बाद उसे जेल से रिहा कर डिटेंशन सेंटर में रखा गया, जहां से भारत वापसी की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
परिवार की भावनाएं:
पिता कृपाल सिंह ने कहा कि बेटे को देखे हुए काफी समय बीत गया है। परिवार हर दिन उसकी राह देख रहा है। उनका कहना है कि जब बेटा लौटेगा तो उसे गले लगाएंगे, जी-भरकर देखेंगे और खूब प्यार करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने परिवार को गहरे मानसिक तनाव से गुजार दिया, लेकिन अब उम्मीद है कि जल्द ही सब कुछ सामान्य होगा।
सबक और प्रतीक्षा:
यह मामला सोशल मीडिया के माध्यम से बने रिश्तों और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के गंभीर परिणामों की ओर इशारा करता है। फिलहाल परिवार की निगाहें भारत और पाकिस्तान के बीच पूरी होने वाली औपचारिकताओं पर टिकी हैं, ताकि बादल सुरक्षित अपने देश और परिवार के बीच लौट सके।
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