हिंदू सम्मेलन में एकता का विराट संकल्प

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर (Ghazipur) जनपद अंतर्गत करमपुर (Karampur) स्थित मेघबरन सिंह हॉकी स्टेडियम में आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन ने क्षेत्र में नई चर्चा को जन्म दिया। सम्मेलन में जनसैलाब उमड़ पड़ा और लगभग दस हजार से अधिक लोगों ने एक साथ हिंदू एकता और सामाजिक समरसता का संकल्प लिया। आयोजन को लेकर सुबह से ही स्टेडियम परिसर में उत्साह और अनुशासन का माहौल देखने को मिला, जहां दूर-दराज के इलाकों से लोग कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे।

महायज्ञ और पूजन से हुई शुरुआत:
सम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्र-कल्याण के उद्देश्य से आयोजित महायज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ में उपस्थित संतों, आयोजकों और अतिथियों ने आहुति देकर समाज की एकता, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात गौ-पूजन और अश्व-पूजन संपन्न हुआ, जिसे शक्ति, परंपरा और संस्कृति के प्रतीक के रूप में देखा गया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी संदेश दिया गया और पंच-परिवर्तन के संकल्प के साथ वृक्षारोपण किया गया।

अनिल जी का ओजस्वी संबोधन:
सम्मेलन के मुख्य वक्ता RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के क्षेत्र प्रचारक (पूर्वी उत्तर प्रदेश) अनिल जी ने अपने संबोधन में हिंदू समाज को एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की सुरक्षा और सम्मान के लिए कभी-कभी बड़े त्याग की आवश्यकता होती है। उन्होंने प्रतीकात्मक शब्दों में कहा कि यदि सोना बेचकर भी लोहा खरीदना पड़े, तो भी सुरक्षा और आत्मरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। उनका यह वक्तव्य पूरे पंडाल में चर्चा का केंद्र बन गया।

धर्म और संस्कृति की रक्षा पर जोर:
अनिल जी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि हिंदू समाज की जड़ें सनातन संस्कृति में हैं और इन्हें कमजोर करने के प्रयास लगातार किए जाते रहे हैं। उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर समाज को सतर्क रहने की आवश्यकता बताई और कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उनके संबोधन के दौरान लोग बार-बार एकता के नारे लगाते नजर आए, जिससे पूरे स्टेडियम में जोश और उत्साह का माहौल बना रहा।

संतों और वक्ताओं के विचार:
देवरहा बाबा पीठ से जुड़े श्याम सुंदर दास जी ने अपने विचार रखते हुए समाज को जोड़ने और आपसी सद्भाव बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा की सबसे बड़ी शक्ति उसका समावेशी स्वरूप है, जो हर वर्ग को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है। अन्य वक्ताओं ने भी सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों पर अपने विचार साझा किए।

आयोजन में राधे मोहन सिंह की भूमिका:
कार्यक्रम को सफल बनाने में मेघबरन सिंह हॉकी स्टेडियम के निदेशक राधे मोहन सिंह की भूमिका अहम रही। उनके कुशल प्रबंधन और सहयोग से इतनी बड़ी संख्या में आए लोगों के लिए व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की गईं। आयोजन में अदालत यादव, इंद्रदेव राजभर, सिकंदर सोनकर, रामलाल प्रजापति, जोखन पाल और सतीश उपाध्याय सहित कई समाजसेवी और प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।

खेल और युवाओं को मिला प्रोत्साहन:
सम्मेलन के दौरान खेल और युवाओं को भी विशेष महत्व दिया गया। मुख्य वक्ता द्वारा स्टेडियम के खिलाड़ियों को हॉकी स्टिक वितरित की गई, जिससे खेल के प्रति उत्साह और बढ़ा। यह संदेश दिया गया कि शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त समाज ही राष्ट्र को मजबूत बना सकता है।

जनसैलाब बना ऐतिहासिक:
करीब दस हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति ने इस सम्मेलन को ऐतिहासिक बना दिया। पूरा स्टेडियम एकजुटता और अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया। कार्यक्रम के अंत में भारत माता की भव्य आरती के साथ सम्मेलन का समापन हुआ, जिसने लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी।

संयोजक का वक्तव्य:
कार्यक्रम के संयोजक अनिकेत सिंह ने बताया कि यह आयोजन सामूहिक प्रयास और समाज के सहयोग से संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि करमपुर की धरती ने यह साबित कर दिया है कि यहां सामाजिक चेतना, खेल और सांस्कृतिक मूल्यों का मजबूत संगम मौजूद है।

वैचारिक संदेश का प्रभाव:
सम्मेलन के दौरान दिया गया “बंटोगे तो कटोगे” का संदेश लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि समाज को विभाजन से बचाकर एकता की राह पर ले जाना ही समय की सबसे बड़ी जरूरत है।


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