रिपोर्टर: जेड ए खान
अलीगढ़ में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां गुड वर्क दिखाने के उद्देश्य से कथित तौर पर फर्जी गिरफ्तारी की पूरी शूटिंग किए जाने का आरोप लगा है। यह मामला तब उजागर हुआ जब घटना का एक वीडियो करीब 54 दिन बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो के सामने आते ही पुलिस विभाग में खलबली मच गई और वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश दिए।
गुड वर्क दिखाने के लिए बनाई गई कथित स्क्रिप्ट:
प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 दिसंबर 2025 को दो युवकों को उनके घर से पुलिस द्वारा उठाया गया। आरोप है कि इसके बाद उन्हें अलीगढ़ (Aligarh) के एक जंगल में ले जाया गया, जहां पहले से पूरी योजना के तहत शूटिंग की तैयारी की गई। कैमरा और पोजीशन सेट करने के बाद युवकों को कैमरे के सामने भागने के लिए कहा गया, ताकि यह दर्शाया जा सके कि पुलिस ने पीछा कर दोनों को गिरफ्तार किया है।
जेब और कपड़ों में रखवाए गए सामान:
वायरल वीडियो में यह साफ दिखाई देता है कि एक दरोगा युवक की जैकेट में चाकू रखवाता है, जबकि एक सिपाही दूसरे युवक की कमर के पीछे बेल्ट में चाकू छुपाता नजर आता है। इसके बाद एक अन्य सिपाही युवक की जेब में मोबाइल रखवाता है। वीडियो में यह भी सुना जा सकता है कि युवक से कहा जा रहा है कि उसे थोड़ा आगे चलाया जाए और फिर गाड़ी से पकड़ लिया जाए, ताकि वीडियो वास्तविक लगे।
कैमरे के सामने गिरफ्तारी का दृश्य:
आरोप है कि इसके बाद युवकों को पकड़ा जाता है और दरोगा के इशारे पर उनकी तलाशी ली जाती है। पहले मोबाइल निकाला जाता है और युवक से कहलवाया जाता है कि उसने दुकान से मोबाइल चोरी किया है। इसके बाद कमर से चाकू निकालकर दिखाया जाता है। दूसरे युवक के साथ भी इसी तरह सवाल-जवाब करते हुए चाकू बरामदगी का दृश्य बनाया गया।
दोबारा शूटिंग और सेल्फी का मामला:
इतना ही नहीं, वीडियो में यह भी सामने आया है कि पहली रिकॉर्डिंग के बाद पुलिस कर्मी आपस में फुटेज चेक करते हैं कि कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई। इसके बाद युवकों के हाथों में फिर से मोबाइल और चाकू देकर दूसरी वीडियो बनाई जाती है। अंत में एक दरोगा युवकों के साथ सेल्फी लेते हुए भी दिखाई देता है।
छत से रिकॉर्ड हुआ पूरा घटनाक्रम:
बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम किसी स्थानीय युवक ने छत से चुपके से अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया था। यह वीडियो लगभग 54 दिनों तक सामने नहीं आई, लेकिन जैसे ही यह सोशल मीडिया पर वायरल हुई, पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। वीडियो के वायरल होने के बाद क्षेत्र में यह सवाल उठने लगे कि इतने दिनों बाद वीडियो को सामने लाने के पीछे क्या वजह रही।
गिरफ्तारी के कागजों में भी विरोधाभास:
मामले में एक बड़ी चूक यह भी बताई जा रही है कि पुलिस ने गिरफ्तारी फर्द में दोनों युवकों को रात के समय गिरफ्तार दिखाया, जबकि वायरल वीडियो दिन के समय की बताई जा रही है। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी का स्थान भी कागजों में अलग और वीडियो में थाना अकराबाद (Akrabad) क्षेत्र के पनेठी (Panethi) के पास एक जंगल बताया जा रहा है।
54 दिनों से जेल में बंद युवक:
जानकारी के अनुसार मोबाइल चोरी और चाकू रखने के आरोप में दोनों युवक पिछले 54 दिनों से जेल में बंद हैं। वीडियो वायरल होने के बाद उनके परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
वीडियो में दिखे पुलिसकर्मी:
वायरल वीडियो में थाना अकराबाद की पनेठी चौकी के प्रभारी रोहित सिद्धू (Rohit Sidhu), सहयोगी दरोगा अलखराम (Alakhram) तथा सिपाही मनोज कुमार (Manoj Kumar) और अमित कुमार (Amit Kumar) दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के आधार पर इन सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई:
वीडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज सिंह जादौन (Neeraj Singh Jadaun) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो दरोगा और दो सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए।
जांच में सही पाया गया मामला:
इस संबंध में क्षेत्र अधिकारी संजीव तोमर (Sanjeev Tomar) ने बताया कि वायरल वीडियो की जांच कराई गई, जिसमें मामला प्रथम दृष्टया सही पाया गया। जांच के आधार पर संबंधित दो दरोगा और दो सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है। साथ ही विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
आगे की कार्रवाई जारी:
क्षेत्र अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।
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