आजम खान ने सिर्फ अखिलेश से की मुलाकात, गर्म हुई राजनीति!

सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) आजम खान (Azam Khan) से मिलने रामपुर (Rampur) पहुंचे। जौहर यूनिवर्सिटी (Jauhar University) में आजम ने उनका स्वागत किया। जेल से रिहाई के बाद यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने मुलाकात रही। मुलाकात के बाद दोनों एक ही कार में बैठे और आजम के घर तक पहुंचे। घर में सिर्फ आजम और अखिलेश गए, जबकि आजम की पत्नी और बेटा इस दौरान मौजूद नहीं थे।


आजम की नाराजगी के चलते सांसद को छोड़ा बरेली में:
मुलाकात के दौरान आजम खान की नाराजगी स्पष्ट हुई। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ अखिलेश से ही मिलेंगे और किसी और से मुलाकात नहीं करेंगे। इसी कारण अखिलेश यादव ने रामपुर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी (Mohibullah Nadvi) को बरेली (Bareilly) में ही छोड़ दिया। आजम ने स्पष्ट किया कि वे सांसद नदवी से पहले कभी नहीं मिले और उनसे परिचित नहीं हैं। इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया।

आजम खान और अखिलेश यादव एक साथ बैठकर बातचीत कर रहे हैं, उनके पीछे सजावटी सामान है।

अखिलेश यादव की यात्रा और स्वागत:
बुधवार सुबह साढ़े 11 बजे अखिलेश लखनऊ (Lucknow) से निजी विमान से रामपुर के लिए रवाना हुए। पहले वे बरेली एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से हेलिकॉप्टर के जरिए दोपहर 12:45 बजे जौहर यूनिवर्सिटी लैंड किए। यूनिवर्सिटी परिसर में कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। स्वागत के दौरान मंच पर भारी भीड़ और उत्साहपूर्ण माहौल देखा गया।

जेल से रिहाई के बाद पहली मुलाकात:
आजम खान 23 सितंबर को जेल से रिहा हुए थे। उस समय अखिलेश यादव उनके स्वागत के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। आजम ने जेल से रिहाई के समय कहा था कि यदि बड़े नेता होते, तो बड़ा नेता उन्हें लेने आता। इस बार की मुलाकात ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ते राजनीतिक तालमेल को दर्शाया।

बाहर निकलने पर अखिलेश ने कहा- आजम साहब बहुत पुराने नेता हैं। उनका गहरा साया हमेशा हमारे साथ रहा है। आजम खान हमारी पार्टी का दरख्त (पेड़) हैं। आजम परिवार पर भाजपा केस करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना चाहती है। यह बड़ी लड़ाई है और उसमें हम सब मिलकर लड़ेंगे।

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से मुलाकात के बाद आजम खान (Azam Khan) फिर से अपने पुराने अंदाज में नजर आए। एक बातचीत में आजम ने कहा, “खूबसूरत हालात आज भी वही हैं, चलिए किस गली में चलेंगे। अब हमारे लिए मोहब्बतों का जुनून समंदर बन चुका है, क्योंकि हम हर कसौटी पर खरे उतर चुके हैं।”

जब उनसे पूछा गया कि इमरजेंसी और वर्तमान समय में क्या अंतर है, तो उनका जवाब था, “पहले आदमियत थी, अब हैवानियत भी नहीं है। यह देखकर शर्म आती है।” आगे के प्लान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “अभी यह तय करना है कि कौन अपना है और कौन नहीं। इसके लिए मुझे कुछ वक्त चाहिए।”

अखिलेश यादव से मुलाकात पर आजम खान ने कहा, “उस परिवार से दो जिंदगियां जुड़ी हैं। मेरी पूरी जिंदगी वहीं बीती है। अब अगली पीढ़ी की जिंदगी भी उसी से जुड़ी है। रिश्तों की डोर इतनी मजबूत होनी चाहिए।”

मुलाकात का राजनीतिक महत्व:
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुलाकात सपा (Samajwadi Party) और आजम खान की राजनीतिक रणनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जेल से रिहाई के बाद आजम खान की सक्रियता और अखिलेश यादव के समर्थन से पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिलने की संभावना है। इस मुलाकात से आगामी चुनावी रणनीति और रामपुर क्षेत्र में सपा की स्थिति को लेकर संदेश भी साफ हुआ।


मीडिया और सुरक्षा व्यवस्था:
मीडिया के सामने दोनों नेताओं ने किसी बड़े बयान से परहेज़ किया। मुलाकात के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। रामपुर पुलिस और निजी सुरक्षा दल ने यूनिवर्सिटी और घर परिसर में निगरानी रखी। इस मुलाकात ने कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह और उम्मीद जगाई।

एक व्यक्ति मोटरसाइकिल पर सवारी कर रहा है, जिसकी छतरी के ऊपर राजनीतिक बैनर और झंडे लगाए गए हैं, जौहर विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार के पास।

कार्यकर्ताओं और पार्टी कैडर के लिए संदेश:
मुलाकात से कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया कि आजम और अखिलेश एकजुट हैं। जेल से रिहाई के बाद आजम की सक्रियता और अखिलेश की राजनीतिक पकड़ दोनों के बीच रणनीतिक तालमेल का संकेत देती है। कार्यकर्ताओं के बीच इस मुलाकात को उत्साहजनक माना जा रहा है और आने वाले चुनावों की रणनीति पर प्रभाव डाल सकती है।

जेल से रिहाई के बाद आजम खान और अखिलेश यादव की यह पहली मुलाकात राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। आजम की नाराजगी, सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को बरेली में छोड़ना और दोनों नेताओं का एक साथ घर जाना इस मुलाकात को और विशेष बनाता है। मुलाकात के बाद कार्यकर्ताओं और पार्टी कैडर में नई उम्मीद और जोश देखा गया है।

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डिस्क्लेमर: यह खबर Media Platforms पर दी गई सूचना पर आधारित है।

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