बसपा सुप्रीमो मायावती 9 अक्टूबर को कांशीराम स्मारक (Kanshiram Smarak) स्थल पर बड़ी रैली करेंगी। यह यूपी (Uttar Pradesh) में बसपा की कमबैक रैली मानी जा रही है। मायावती रैली में करीब 3 घंटे मंच पर रहेंगी और उनके साथ 7 शीर्ष नेता भी उपस्थित होंगे। यह रैली 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की रणनीति और संगठन को फिर से सक्रिय करने का बड़ा कदम मानी जा रही है।
मंच पर 7 नेताओं के साथ दिखेंगी मायावती:
रैली का सबसे बड़ा आकर्षण मंच होगा। मायावती के साथ उनके भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand), भाई आनंद कुमार (Anand Kumar), सीनियर नेता सतीश चंद्र मिश्र (Satish Chandra Mishra) और अन्य सेकेंड लाइन के नेता मंच पर बैठेंगे। आमतौर पर मायावती अकेले मंच पर बैठना पसंद करती हैं, लेकिन इस बार वह 3 घंटे तक मंच पर रहेंगी और अन्य नेताओं को भाषण का मौका भी देंगी। इससे पार्टी की नई रीति-नीति और संगठन की सेकंड लाइन का संदेश कार्यकर्ताओं तक जाएगा।
रैली के बाद कार्यकर्ताओं से मीटिंग:
रैली खत्म होने के बाद मायावती चुनिंदा कार्यकर्ताओं और जिला प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह बैठक संगठनात्मक पुनर्गठन और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है। बैठक में दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के कार्यकर्ता शामिल होंगे और पार्टी के भविष्य के रोडमैप में उनका फीडबैक शामिल किया जाएगा।
5 लाख की भीड़ लाने का लक्ष्य:
बसपा ने इस रैली के लिए पूरे प्रदेश से 5 लाख कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य रखा है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से कम से कम 5 गाड़ियों में समर्थकों को लाने की व्यवस्था की गई है। जिला स्तर पर जिम्मेदारी बांटी गई है और विधानसभा प्रभारी न्यूनतम 5000 कार्यकर्ताओं को लाने के लिए निर्देशित हैं। लॉजिस्टिक सेल ट्रैफिक और पार्किंग मॉनिटरिंग करेगा।
सोशल मीडिया और स्थानीय प्रचार पर फोकस:
बसपा ने इस बार डिजिटल और मैदान दोनों मोर्चों पर अभियान चलाया है। दीवारों पर पेंटिंग, नीले झंडों से सजी गलियां और ग्राम स्तर पर नुक्कड़ सभाओं के जरिए “दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक की आवाज बहुजन समाज का नया आगाज” और “राशन नहीं, शासन चाहिए, लखनऊ चलो” जैसे नारे बुलंद किए जा रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य समाज के उन वर्गों तक पहुंचना है जो पिछले वर्षों में उससे दूर हुए थे।
दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों पर विशेष ध्यान:
बीते हफ्तों से बसपा कार्यकर्ता ग्राम स्तर पर जनसंपर्क और प्रचार अभियान में लगे हुए हैं। विशेष तौर पर दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग को रैली में लाने के लिए हर जिले में जिम्मेदारी तय की गई है। पार्टी नए पोस्टर, बैनर और गीतों के जरिए संदेश फैला रही है।
राजनीतिक माहौल और विरोधी प्रतिक्रिया:
मायावती की रैली से पहले आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) और कांग्रेस (Congress) भी सक्रिय हुई हैं। आजाद समाज पार्टी ने कांशीराम की पुण्यतिथि पर प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस नेता उदित राज ने मायावती पर निशाना साधा और कहा कि वह बाहर से अंबेडकर की बात करती हैं, लेकिन दिल में ‘कमल’ रखती हैं।
बसपा का पलटवार:
बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल (Vishwanath Pal) ने कहा कि कांशीराम की असली उत्तराधिकारी बसपा सुप्रीमो मायावती ही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रैली में दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और वंचित वर्गों को संबोधित किया जाएगा और पार्टी किसी की बी-टीम नहीं है। उनका उद्देश्य 2007 की तरह फिर से जमीन पर काम कर पार्टी को 2027 में सत्ता दिलाना है।
चार साल बाद मेगा रैली:
मायावती 4 साल बाद कांशीराम स्मारक पर रैली करने जा रही हैं। पिछली बार उन्होंने 9 अक्टूबर 2021 को रैली की थी, जो 2022 विधानसभा चुनाव से पहले हुई थी। उस चुनाव में बसपा को सिर्फ एक सीट मिली और वोट शेयर घटकर 12.8% रह गया। 403 सदस्यीय सदन में बसपा के केवल उमा शंकर सिंह (Uma Shankar Singh) ही विधायक हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में भी पार्टी का खाता नहीं खुल सका।
निष्कर्ष:
मायावती की यह रैली पार्टी के पुनर्गठन और 2027 विधानसभा चुनाव के रोडमैप की दिशा में अहम मानी जा रही है। मंच पर 7 नेताओं के साथ उनका तीन घंटे का प्रवास और कार्यकर्ताओं से बैठक, बसपा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है
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