सेवराई। आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित होने वाले पुष्टाहार पर लगा विभाग का ग्रहण, बड़े बाबू और अधिकारियों की मिलीभगत से प्रति बोरी एक निश्चित राशी वसूला जा रहा है। जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को वितरित होने वाली पंजीरी बन रही है पशु चारा।
बाल विकास पुष्टाहार विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा गर्भवती, धात्री, और बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य और प्रोटीन के लिए पंजीरी दी जाती है। लेकिन भदौरा विकास खण्ड अन्तर्गत करीब 240 केंद्रों विभागिय अधिकारियों और बड़े बाबू की मिलीभगत से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ से प्रति बोरी अवैध वसूली की जाती है। नाम न छापने के शर्त पर कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ ने बताया कि सभी कार्यकर्ता अधिकारियों के कार्यवाई के डर से मजबूरी वश प्रति बोरी के हिसाब से पैसा देती है। कुछ गांव के ग्रामीणों नेेे आरोप लगाया की पंजीरी को पशुुु चारे के रूप में पशु पालकोंं को भी बेचा जाता है।
लॉक डाउन की वजह से बंद चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री को भी प्रति पैकेट पंजीरी देने का प्रावधान है। लेकिन इन मुनाफाखोर बिचौलियों के आगे शासन द्वारा चलाई जा रही है महत्वकांक्षी योजना का लाभ लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। बताते चलें कि भदौरा ब्लाक अंतर्गत करीब 240 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, और लगभग 15 मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कार्यरत है। वहीं कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ता ना होने की दशा में मुख्य सेविका की द्वारा दूसरी कार्यकर्ताओं को ही प्रभार दिया गया है। ऐसे में शासन द्वारा बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए हजारों रुपए मूल्य की मिली पंजीरी महज कुछ रुपए के लिए पशु चारा के रूप में प्रयोग की जा रही है।
इस बाबत जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीत कुमार पांडे ने बताया कि मामला हमारे संज्ञान में नहीं है अगर धन उगाही की शिकायत मिलती है तो दोषियों के खिलाफ नियमा अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।