सहायक अध्यापक भर्ती पर क्यों लगी रोक? सिस्टम में इतना बड़ा खेल?

ब्यूरो रिपोर्ट| योगी सरकार (Yogi Government) की दूसरी सबसे बड़ी सहायक अध्यापक भर्ती (UP Assistant Teachers Recruitment) परीक्षा के लिए विज्ञप्ति दिसम्बर 2018 में जारी की गई थी, लेकिन करीब डेड साल बाद जब 8 मई को इलाहबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच ने लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित कर तीन महीने में नियुक्ति पूरी करने का आदेश दिया तो लगा अब कानूनी पेंच नहीं फंसेगा. लेकिन एक बार फिर नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है.

 

 

चार गलत प्रश्न ने रोकी नियुक्ति प्रक्रिया

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चार गलत प्रशनों को लेकर अभ्यर्थियों की तरफ से दाखिल याचिका पर स्टे लगा दिया है. अब इस मामले की सुनवाई 12 जुलाई को होनी है. बताए चलें कि जिलेवार मेरिट जारी होने की बाद बुधवार से चयनित अभ्यर्थियों की काउन्सलिंग होनी थी.हजारों की संख्या में अभ्यर्थी ग़ाज़ियाबाद से ग़ाज़ीपुर व गोरखपुर तक आकर कॉउंसलिंग कराएं लेकिन पुनः अब उस पर भी रोक लग गई है.

हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अभ्यर्थी विवादित प्रश्नों पर आपत्तियों को एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करें. आपत्तियों को सरकार यूजीसी को प्रेषित करेगी और यूजीसी आपत्तियों का निस्तारण करेगी. अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी. इसके साथ ही 8 मई के बाद से सरकार द्वारा कराई गई सभी प्रक्रिया पर रोक लग गई है. इसमें उत्तरमाला, संशोधित उत्तरमाला, परिणाम, जिला विकल्प, जिला आवंटन, काउंसलिंग प्रक्रिया समेत सभी प्रक्रिया शून्य घोषित हो गई है.

  • दरअसल, पूरी भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई विवाद सामने आए, जिसे लेकर अभ्यर्थी कोर्ट की शरण में पहुंचे. जानिए कब-कब फंसा पेंच.

कट ऑफ मार्क्स को लेकर हुआ विवाद

बता दें कि योगी सरकार के सत्तासीन होने के बाद दिसंबर 2018 में प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए एक शासनादेश जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे. इस शासनादेश में कट ऑफ का जिक्र तो था, लेकिन कितना होगा इसका जिक्र नहीं था. इस भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 6 जनवरी 2019 को राज्य के 800 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई.

कट ऑफ घोषित होते ही मामला पहुंचा कोर्ट

इसके ठीक एक दिन बाद 7 दिसंबर 2018 को न्यूनतम कटऑफ की घोषणा की गई. इसके तहत सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 150 में 97 और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 150 में 90 अंक लाने होंगे. यानी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 65 फीसद और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 60 फीसद अंक पर पास किया जाएगा. इसी कटऑफ को लेकर परीक्षार्थियों ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी.

हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में सुनाया फैसला

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच हाईकोर्ट ने सरकार के कट ऑफ मार्क्स के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता, सरकार लिखित परीक्षा के परिणाम घोषित कर तीन महीने में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करे.

आंसर की जारी होने से फिर बढ़ा विवाद

प्राइमरी स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती का परिणाम घोषित होने के बाद प्रश्नों के उत्तर विकल्प गलत होने को लेकर 1 या 2 अंक से पीछे रह गए हजारों अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है. अमरेंद्र कुमार सिंह व 706 अन्य, मनोज कुमार यादव व 36 अन्य, अंशुल सिंह व 29 अन्य और सुनीता व 35 अन्य की याचिकाएं हैं. याचियों का कहना है कि कई सवालों के उत्तर विकल्प गलत होने के कारण, सही जवाब देने के बावजूद उन्हें मेरिट में स्थान नहींं दिया गया है. गलत उत्तर देने वालों को चयनित कर दिया गया है. याचिकाओं में मांग की गई है कि गलत उत्तर वाले प्रश्न हटाकर नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाई जाए और घोषित परिणाम रद्द किया जाए. याचिकाओं में अन्य कानूनी मुद्दे भी उठाये गए हैं.

1 या 2 अंक से पीछे रहे हजारों अभ्यर्थियों को राहत नहीं

उधर, प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में अभ्यर्थियों को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है. हाईकोर्ट ने कहा है कि नियुक्तियां याचिका के अंतिम निर्णय की विषय वस्तु होगी. कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार से 3 हफ्ते में जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी. कोर्ट ने रोहित, अंशू सिंह सहित दर्जनों याचिकाओं पर ये आदेश दिया है. याचिकाओं में चयन परिणाम रद्द करने मांग की गई है. जस्टिस प्रकाश पाडिया की एकल पीठ में सुनवाई हुई.

अभी सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है मामला

उधर कट ऑफ मार्क्स को लेकर शिक्षामित्र संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. उनका कहना है कि कट ऑफ मार्क्स की वजह से उन्हें मिला आखिरी मौका भी फिसल गया है. अभी इसकी सुनवाई भी होनी बाकी है. लिहाजा आने वाले दिनों में यह मामला फंसता ही नजर आ रहा है.

अब 12 जुलाई के बाद ही होगी स्थिति साफ

आज से शुरू हुई जिलेवार काउन्सलिंग को अब रोक दिया जाएगा. यानी जिस तेजी से सरकार नियुक्ति पत्र देने की ओर बढ़ रही थी अब उस पर कानूनी पेंच फंस गया है. 6 जून से काउन्सलिंग पूरी कर नियुक्ति पत्र देने की कावाद पर अब रोक लग गई है. अब कोरोना संकट के इस दौरा में इस मामले के लंबे खींचने की संभावना है.

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