लखनऊ/मऊ। सुभासपा विधायक और मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता आखिरकार बहाल हो गई है। सोमवार, 8 सितंबर 2025 को उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर उनकी सदस्यता बहाल करने की आधिकारिक घोषणा कर दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 20 अगस्त को अब्बास अंसारी को मिली राहत के बाद से ही यह तय था कि वे दोबारा सदन में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
मामला क्या था?
मामला 3 मार्च 2022 का है, जब मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा के दौरान अब्बास ने कथित रूप से सरकारी अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि सत्ता में आने पर उन्हें “हिसाब-किताब” से गुजरना होगा। इस भाषण के बाद मौस्था्ज कॉलेज थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मामले की सुनवाई के बाद विशेष MP-MLA कोर्ट ने 31 मई 2025 को उन्हें विभिन्न धाराओं — IPC 153-ए (सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने), 189, 506 और 171-F आदि — में दोषी ठहराते हुए दो साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने 1 जून 2025 को अधिसूचना जारी कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी और मऊ सीट को रिक्त घोषित कर दिया।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और राहत
अब्बास अंसारी ने निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 2025 को निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया और सजा पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि दोषसिद्धि और सजा में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां हैं और पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। इस आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल होने का रास्ता साफ हो गया।

8 सितंबर को बहाल हुई सदस्यता
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विधानसभा सचिवालय ने 8 सितंबर 2025 को नई अधिसूचना जारी कर अब्बास अंसारी की सदस्यता बहाल कर दी। करीब सवा तीन महीने बाद वे पुनः मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में सदन में वापसी कर रहे हैं। अब्बास अंसारी दोबारा विधायी कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे।
पिछले घटनाक्रम की संक्षिप्त झलक
मई 2025: मऊ की MP-MLA कोर्ट ने अब्बास को दो साल कैद और जुर्माने की सजा सुनाई।
1 जून 2025: विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी।
जून–जुलाई 2025: उनकी सजा पर आपत्तियां सत्र अदालत में खारिज की गईं।
20 अगस्त 2025: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा रद्द कर दी और सदस्यता बहाली का मार्ग प्रशस्त किया।
8 सितंबर 2025: विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर उनकी सदस्यता बहाल की।
राजनीतिक असर और प्रतिक्रियाएं
अब्बास अंसारी की सदस्यता बहाल होने से पूर्वांचल की राजनीति में हलचल मच गई है। सुभासपा समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि बार-बार विवादों में घिरे अब्बास को जनता के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि भड़काऊ राजनीति पर। मऊ में संभावित उपचुनाव की संभावना अब पूरी तरह खत्म हो गई है।