ट्रम्प के पास जंग जारी रखने के लिए 7 दिन:1 मई से पहले अमेरिकी संसद की मंजूरी जरूरी, पार्टी के 10 सांसद विरोध में

अमेरिका (United States) के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने व्हाइट हाउस (White House) में इजराइल (Israel) और लेबनान (Lebanon) के बीच राजदूत स्तर की दूसरी बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच चल रहे सीजफायर को तीन हफ्तों के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।

नेताओं को वार्ता के लिए बुलाने की तैयारी:
डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि वह जल्द ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन (Joseph Aoun) को व्हाइट हाउस (White House) में आमंत्रित करने की योजना बना रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाना है।

ईरान को लेकर अमेरिका का रुख स्पष्ट:
ईरान (Iran) के साथ संभावित समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कहा कि कोई भी डील तभी होगी जब वह अमेरिका (United States) के हित में होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई समय सीमा तय नहीं है और जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान (Iran) के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि पारंपरिक हमलों से पहले ही काफी नुकसान हो चुका है।

पिछले 24 घंटे के बड़े घटनाक्रम:
बीते 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सेना को होर्मुज (Hormuz) क्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछाने वाले छोटे जहाजों को नष्ट करने के निर्देश दिए हैं। वहीं भारत (India) सरकार ने अपने नागरिकों को ईरान (Iran) की यात्रा से बचने की सलाह दी है।
ईरान (Iran) ने पहली बार होर्मुज (Hormuz) में जहाजों से टोल वसूली की है, हालांकि इसकी राशि सार्वजनिक नहीं की गई है। दूसरी ओर, निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी (Reza Pahlavi) के खिलाफ बर्लिन (Berlin) में विरोध प्रदर्शन हुआ। वहीं अमेरिकी सीनेट (US Senate) में ट्रम्प (Donald Trump) की युद्ध शक्तियों को सीमित करने का प्रस्ताव फिर खारिज हो गया।

ईरान पर हमले की नई योजना की चर्चा:
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका (United States) की सेना ईरान (Iran) के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है। पेंटागन (Pentagon) होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait), दक्षिणी अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी में ईरानी सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाने की संभावनाओं पर काम कर रहा है।
सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की तेज हमलावर नौकाओं और माइंस बिछाने वाले जहाजों को लक्ष्य बनाया जा सकता है, जो इस समुद्री मार्ग पर दबाव बनाए रखते हैं।

NATO देशों को लेकर नई रणनीति:
पोलिटिको (Politico) की रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प प्रशासन ने NATO (NATO) देशों को दो श्रेणियों में बांटने की सूची तैयार की है। इसमें यह देखा गया है कि किस देश ने ईरान (Iran) के खिलाफ अमेरिका (United States) का साथ दिया और किसने नहीं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पोलैंड (Poland) और रोमानिया (Romania) को सकारात्मक सूची में रखा गया है, जबकि अन्य कई देशों को नकारात्मक सूची में शामिल किया गया है। हालांकि व्हाइट हाउस (White House) ने इस सूची की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

होर्मुज को लेकर ईरान की सख्त चेतावनी:
ईरान (Iran) के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने कहा है कि जब तक अमेरिका (United States) द्वारा नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक पूर्ण युद्धविराम संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में होर्मुज (Hormuz) को दोबारा खोलना संभव नहीं है।
ईरान (Iran) के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी जमी हुई संपत्तियों को जारी नहीं किया गया, तो सीजफायर टूट सकता है।

ईरान के अंदरूनी हालात पर रिपोर्ट:
रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान (Tehran) में इराकी मिलिशिया की मौजूदगी के दावे सामने आए हैं, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) की रिपोर्ट में बताया गया है कि मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं और उनकी भूमिका सीमित हो गई है।
बताया गया है कि वह घायल हैं और फिलहाल गोपनीय तरीके से काम कर रहे हैं। अब निर्णय लेने की प्रक्रिया में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडरों की भूमिका बढ़ गई है।

निष्कर्ष:
मध्य पूर्व (Middle East) में सीजफायर बढ़ने के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिका (United States), ईरान (Iran) और इजराइल (Israel) के बीच तनाव अब भी बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बातचीत से स्थायी समाधान निकलता है या स्थिति फिर से बिगड़ती है।

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