उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलिया (Ballia) जिले में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां पेट्रोल न मिलने के कारण निजी एंबुलेंस में ही एक मरीज की मौत हो गई। इस घटना ने प्रशासन को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह (Mangla Prasad Singh) ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

डीएम ने लिया मामले का संज्ञान:
घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह (Mangla Prasad Singh) ने तुरंत जांच के आदेश दिए। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पर्याप्त स्टॉक के बावजूद नहीं दिया गया तेल:
जांच में सामने आया कि संबंधित पेट्रोल पंप पर आवश्यक मात्रा में डीजल और पेट्रोल उपलब्ध था। जानकारी के अनुसार, वहां करीब 4 हजार लीटर डीजल और 8 हजार लीटर पेट्रोल का स्टॉक मौजूद था। इसके बावजूद निजी एंबुलेंस को तेल देने से इनकार किया गया, जिसे प्रशासन ने अत्यंत गंभीर लापरवाही माना है।
सीसीटीवी और पूछताछ में खुलासा:
प्रशासन द्वारा पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई और कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद एंबुलेंस को तेल नहीं दिया गया। इसी लापरवाही के चलते मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई।
एसडीएम को सूचना, फिर भी नहीं मिली मदद:
घटना के दौरान एंबुलेंस चालक ने बैरिया (Bairia) के एसडीएम को फोन पर जानकारी दी थी, लेकिन आरोप है कि वहां से कोई प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस लापरवाही पर भी जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया है और संबंधित अधिकारी को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है।
पेट्रोल पंप संचालकों को दिए सख्त निर्देश:
घटना के बाद प्रशासन ने जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों की बैठक बुलाई। इस बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई नहीं जानी चाहिए और नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
घटना का पूरा मामला:
यह घटना बैरिया थाना क्षेत्र के पांडेपुर (Pandepur) गांव की है। जानकारी के अनुसार, देर रात छोटू वर्मा (Chhotu Verma) को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। परिजन उन्हें तुरंत निजी एंबुलेंस से अस्पताल ले जा रहे थे। गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जाने के बाद एंबुलेंस का ईंधन खत्म हो गया।
इसके बाद परिजन पास के पेट्रोल पंप पर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि वहां तेल देने से मना कर दिया गया। समय पर इलाज न मिलने और देरी के कारण छोटू वर्मा की एंबुलेंस में ही मौत हो गई, जिससे परिवार में शोक का माहौल है।
प्रशासन की कार्रवाई से उठी उम्मीद:
इस घटना के बाद प्रशासन की सख्ती से यह उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं होगी। यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है।
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रिपोर्टर: अमित कुमार

