गाजीपुर: पत्रकार भवन के लिए भटक रहे जमानियां के पत्रकार, पेड़ और मंदिर बना अस्थायी ‘प्रेस कक्ष’
Ghazipur के Zamania तहसील क्षेत्र में पत्रकारों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार इस भीषण गर्मी में बिना किसी स्थायी पत्रकार भवन या कार्यालय के काम करने को मजबूर हैं। 42 से 45 डिग्री तापमान के बीच पत्रकार कभी सड़क किनारे, कभी पेड़ की छांव तो कभी तहसील परिसर के पीछे बने मंदिर में बैठकर खबरें जुटाने और भेजने का कार्य कर रहे हैं।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि तहसील मुख्यालय के आसपास कोतवाली, क्षेत्राधिकारी कार्यालय, ब्लॉक कार्यालय और नगर पालिका कार्यालय जैसी महत्वपूर्ण सरकारी संस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन पत्रकारों के लिए आज तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई।
भीषण गर्मी में भी जारी है पत्रकारों का काम:
NH-24 के किनारे स्थित जमानियां तहसील क्षेत्र में पत्रकार लगातार प्रशासनिक गतिविधियों और जनसमस्याओं को जनता तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बैठने के लिए स्थायी स्थान तक उपलब्ध नहीं हो सका है।
पत्रकारों का कहना है कि गर्मी, सर्दी और बारिश जैसे हर मौसम में वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं, लेकिन उनकी मूलभूत समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा। तेज धूप और लू के बीच पेड़ की छांव और मंदिर परिसर अस्थायी ‘प्रेस कक्ष’ का रूप ले चुके हैं।
कई बार उठाई गई पत्रकार भवन की मांग:
स्थानीय पत्रकार Pradeep Sharma, Ratan Srivastava, Zafar Iqbal और Abhishek Srivastava ने बताया कि पत्रकार भवन की मांग कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि जनपद में लोकसभा और राज्यसभा सांसद के साथ क्षेत्रीय विधायक भी मौजूद हैं, इसके बावजूद पत्रकारों के लिए एक छोटे भवन की व्यवस्था तक नहीं हो सकी। पत्रकारों ने यह भी कहा कि प्रदेश स्तर पर तहसील क्षेत्रों में पत्रकारों के लिए कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
पत्रकारों ने उठाए कई सवाल:
पत्रकारों ने सवाल उठाया कि जब लोकतंत्र की आवाज उठाने वाले ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहेंगे तो व्यवस्था की सच्चाई जनता तक कैसे पहुंचेगी। उनका कहना है कि पत्रकार लगातार समाज और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं तथा पीड़ितों की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाते हैं।
इसके बावजूद पत्रकारों की समस्याओं को लेकर कोई गंभीर पहल नहीं दिखाई दे रही। स्थानीय पत्रकारों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पत्रकारों की समस्याओं को समझने और समाधान की दिशा में आगे आने की जरूरत है।
स्थायी व्यवस्था की मांग तेज:
पत्रकारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द पत्रकार भवन की व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि पत्रकारों को कार्य करने के लिए न्यूनतम सुविधाएं मिल सकें। उनका कहना है कि यदि पत्रकारों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा तो वे और अधिक प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।
स्थानीय स्तर पर अब पत्रकारों की यह मांग चर्चा का विषय बनती जा रही है और लोग भी पत्रकारों की समस्याओं को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं।
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रिपोर्टर: जफ़र इकबाल