Video: गाजीपुर: योगी कैबिनेट के फैसले पर कर्मचारी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

रिपोर्टर: प्रदीप शर्मा

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन फैसलों में सरकारी कर्मचारियों के निवेश से जुड़े नियमों में बदलाव और उच्च शिक्षा क्षेत्र के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा बहाल करने जैसे निर्णय शामिल हैं। कैबिनेट के इन निर्णयों को लेकर कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ संगठनों ने फैसलों का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने इन पर सवाल भी उठाए हैं।

कर्मचारियों के निवेश पर नई सीमा तय:
उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) की कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब सरकारी कर्मचारी अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक राशि शेयर या म्यूचुअल फंड (Share or Mutual Fund) में निवेश नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्तियों का पूरा ब्यौरा भी देना होगा। सरकार के इस निर्णय को पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कर्मचारियों के कुछ संगठनों ने इस पर अपनी अलग-अलग राय व्यक्त की है।

शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा:
कैबिनेट के एक अन्य फैसले में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) की सुविधा बहाल करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो लंबे समय से इस सुविधा की मांग कर रहे थे। कर्मचारियों के संगठनों ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए इसका स्वागत किया है।

कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष की प्रतिक्रिया:
शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ (Non-Teaching Employees Association) के जिला अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह शमी (Vivek Kumar Singh Shami) ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नीति बनाने वाले अधिकांश अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) और प्रांतीय सिविल सेवा (Provincial Civil Service) के उच्च पदों पर कार्यरत होते हैं, जिनका वेतन अपेक्षाकृत अधिक होता है। उनका कहना था कि निचले स्तर के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति अलग होती है और उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नीति निर्माण करते समय कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

नियमों को लेकर उठाए गए सवाल:
विवेक कुमार सिंह शमी (Vivek Kumar Singh Shami) ने कहा कि कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए बचत और निवेश करना आसान नहीं होता। उनका कहना था कि जिन कर्मचारियों की मूल वेतन राशि कम है, उनके लिए इस तरह के नियमों का व्यावहारिक प्रभाव अलग हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नीति बनाते समय विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को समझना आवश्यक है।

कैशलेस सुविधा पर जताया स्वागत:
कैशलेस इलाज की सुविधा बहाल किए जाने पर विवेक कुमार सिंह शमी (Vivek Kumar Singh Shami) ने इसे सकारात्मक कदम बताया। उनका कहना था कि इससे कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी मामलों में राहत मिलेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कई विभागों में इस सुविधा का लाभ पहले से उपलब्ध है, इसलिए जिन कर्मचारियों को अब तक इसका लाभ नहीं मिल रहा था, उन्हें भी इसका फायदा मिलना चाहिए।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की प्रतिक्रिया:
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (State Employees Joint Council) के जिला अध्यक्ष दुर्गेश श्रीवास्तव (Durgesh Srivastava) ने कैबिनेट के फैसलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है तो कर्मचारी संगठन उसका स्वागत करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक पारदर्शिता से जुड़े नियमों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए, ताकि सभी पक्षों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

कर्मचारियों को मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ:
दुर्गेश श्रीवास्तव (Durgesh Srivastava) ने कहा कि शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा बहाल होने से कई कर्मचारियों को राहत मिलेगी। उनका कहना था कि बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग के कई कर्मचारी लंबे समय से इस सुविधा से वंचित थे। अब इस फैसले के बाद उन्हें भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

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