Video:54 साल के हुए योगी आदित्यनाथ: 22 की उम्र में संन्यास, फिर महंत से मुख्यमंत्री तक का सफर, ऐसे हैं अजय सिंह बिष्ट

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) का 5 जून को 54वां जन्मदिन है। गोरक्षपीठ (Gorakshpeeth) के महंत से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का उनका सफर लंबे सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक अनुभवों से होकर गुजरा है। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने धार्मिक नेतृत्व, संसदीय राजनीति और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। वर्षों के दौरान उन्होंने प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है।

योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक और सामाजिक जीवन विभिन्न पड़ावों से होकर आगे बढ़ा, जिसमें धार्मिक परंपरा, संगठनात्मक जिम्मेदारियां और जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य शामिल रहे। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनाया है।

पौड़ी गढ़वाल से गोरक्षपीठ तक का सफर:

योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड (Uttarakhand) के पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) जिले के पंचूर (Panchur) गांव में हुआ था। उनका मूल नाम अजय सिंह बिष्ट (Ajay Singh Bisht) है। उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय (Garhwal University) से गणित विषय में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की।

वर्ष 1993 में अध्ययन के दौरान उनका गोरखपुर (Gorakhpur) आना हुआ। इसके बाद गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Temple) से उनका जुड़ाव बढ़ा और 15 फरवरी 1994 को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ (Avaidyanath) से दीक्षा प्राप्त कर उन्होंने संन्यास ग्रहण किया। इसी के साथ अजय सिंह बिष्ट का नाम योगी आदित्यनाथ हो गया।

कम उम्र में मिली राजनीतिक पहचान:

वर्ष 1998 में योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। उस समय वे देश के सबसे कम उम्र के सांसदों में शामिल रहे। इसके बाद उन्होंने लगातार कई बार गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और पूर्वांचल की राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

संसद सदस्य के रूप में उन्होंने विभिन्न जनहित और क्षेत्रीय मुद्दों को उठाया। लगातार चुनावी सफलताओं ने उन्हें भारतीय राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बना दिया।

धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन:

गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी और महंत के रूप में योगी आदित्यनाथ के कंधों पर धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी भी रही। गोरक्षपीठ से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक गतिविधियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी पहचान लगातार विस्तृत होती गई।

पूर्वांचल क्षेत्र में उनकी सक्रियता और जनसंपर्क कार्यक्रमों ने उन्हें व्यापक जनसमर्थन दिलाने में भूमिका निभाई। इसी दौरान वे विभिन्न सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों को लेकर भी चर्चा में रहे।

राजनीति में बढ़ता प्रभाव और नेतृत्व:

वर्ष 2007 और 2009 के दौरान भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के भीतर और बाहर राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक प्रभाव और जनाधार के कारण उनका राजनीतिक कद मजबूत होता गया।

विभिन्न चुनावों में सक्रिय प्रचार और संगठनात्मक कार्यों के चलते वे पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पूर्वांचल में उनकी लोकप्रियता ने उन्हें प्रदेश स्तर के नेतृत्व तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2017 में संभाली प्रदेश की कमान:

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर कई योजनाओं और कार्यक्रमों के संचालन की जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद वर्ष 2022 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में दोबारा सरकार बनने पर उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। गोरखपुर शहर (Gorakhpur City) विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर वे पहली बार विधायक भी बने।

कठोर दिनचर्या और सक्रिय कार्यशैली:

योगी आदित्यनाथ अपनी नियमित दिनचर्या और सक्रिय कार्यशैली के लिए भी जाने जाते हैं। धार्मिक गतिविधियों, जनसंपर्क, प्रशासनिक बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी निरंतर भागीदारी रहती है।

उनकी दिनचर्या में योग, पूजा-पाठ, जनसुनवाई और विभिन्न प्रशासनिक कार्य शामिल बताए जाते हैं। राजनीतिक और धार्मिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने अपनी अलग कार्यशैली विकसित की है।

राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता प्रभाव:

मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए योगी आदित्यनाथ राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रमुख चेहरों में शामिल हुए हैं। विभिन्न राज्यों के चुनावों में प्रचार अभियान की जिम्मेदारी संभालने के कारण उनकी पहचान एक प्रमुख प्रचारक के रूप में भी बनी है।

समर्थकों के अनुसार विकास, प्रशासन और संगठनात्मक क्षमता के कारण उनका राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है। वहीं राजनीतिक जीवन में उनका सफर धार्मिक नेतृत्व से प्रशासनिक नेतृत्व तक की एक महत्वपूर्ण यात्रा के रूप में देखा जाता है।

Disclaimer:

यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com

#YogiAdityanath #UttarPradesh #Gorakhpur #Gorakshpeeth #BJP #PauriGarhwal #PoliticalJourney

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading