हवशी शिक्षक, लालची ससुराल…

अभिनेंद्र की कलम से…

भारत में नारी की पूजा होती है. औरतें इस झूठ को जानती हैं. हर औरत के बस की बात नहीं कि अपने लिए खड़ी हो जाएं इसलिए पूजा को सच मान लेती है. वैसे बात यहीं खत्म नहीं होती है. देश में राष्ट्रगान गाकर देशभक्ति सब जताते होंगे। नवरात्रों में मां की नौ रूपों की पूजा भी करते होंगे। लेकिन क्या वाकई लोग नारी का सम्मान करते हैं? मैं सबकी बातें तो नहीं कह सकता लेकिन जो घटनाएं घट रही हैं उन पर सवाल तो जरूर खड़ा कर सकता हूं।

किसी आफताब अमीन पूनावाला को कैसे ये बात समझ आएगी जो अपनी ही प्रेमिका श्रद्धा वालकर के टुकड़े टुकड़े कर देता है. जिसको कोई सजा दी जाए तो वो कम हो। दुनिया में औरतों की लड़ाई भूगोल के साथ बदल जाती है. मुमकिन है भारत की बेटियों की लड़ाई ज़बरन हिजाब थोपे जाने से अलग हो. इस बात को लेकर हो कि हमें गर्भ में मार देने से लेकर गर्भ से बाहर आने पर मार देने की सोच से बचाया जाए. उन मर्दों से बचाया जाए जो राष्ट्रगान तो ठीक ठीक गाते हैं, पूरे आदर के साथ गाते हैं मगर हम लड़कियों का सम्मान नागरिकों की तरह नहीं करते. ऐसे मर्दों की दुनिया में औरतों को अधिकार संविधान नहीं देता है, उनका बाप देता है, भाई देता है, पति देता है, प्रेमी देता है. और अब तो शिक्षक भी देता।

एक शिक्षक को भगवान का दर्जा दिया जाता है क्योंकि गुरू ही शिष्य के भविष्य को बनाता है। लेकिन वाराणसी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने गुरु-शिष्य के रिश्ते को तार-तार कर दिया।

थाना क्षेत्र के गोपपुर स्थित एक स्कूल में पढ़ने वाली हाईस्कूल की छात्रा का उसी विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक शुभम मिश्रा (26वर्ष) व्हाट्सएप के माध्यम से अश्लील मैसेज भेजते। चैटिंग करते हुए बार-बार मिलने के लिए दबाव भी बनाने लगा। इस दौरान आरोपी शिक्षक ने अपने हाथ को किसी धारदार हथियार से काटकर जान देने की धमकी देते हुए छात्रा को डराते-धमकाते हुये बार-बार मिलने का दबाव बनाया।

यही नहीं टीचर, स्कूल में छात्रा को अकेला पाकर तंग भी करने लगा। पीड़िता छात्रा द्वारा परिजनों को जानकारी देने पर मंगलवार को परिजनों की तहरीर पर आरोपी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 354क, 7/8 पाक्सो एक्ट व 67 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपी शुभम मिश्रा निवासी चौक को उसके मोबाइल संग गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्रवाई कर रही है।

विचार हर घर में दिए जाने वाले संस्कारों पर करना होगा। पाबंदियां लड़कियों पर नहीं, मर्दों की विकृत मानसिकता पर लगानी होगी।

बात केवल शिक्षक की नहीं है, उन लड़कियों के कहानियों की भी लंबी सूची है जिन्हे केवल इसलिए मार दिया गया क्योंकि उन्होंने दहेज़ नही दिया। ज्यादातर जो महिलाएं दहेज प्रथा का शिकार होती हैं, वो उनमें सुधार करने की बजाय उसको और बढ़ावा देती हैं। जैसे अपने साथ हुए हर अन्याय का बदला अपने बहू से ही लेने की प्रथा बन गई हो।

क्या ये हमारे लोकतांत्रिक संविधानों का उलघंन नही है? जो देश को जागरूक करने की बजाय, गलत प्रथाओं को बढ़ावा देता हो जिससे महिलाओं की जान चली जाए, वो देश हित में कैसे हो सकता है? क्या ये देश द्रोह नही है। समस्या यही है कि हमारे देश में जहां देश के सम्मान को तार तार किया जाता है उस जनता चुप रहती है और राजनीतिक मुद्दों में बर्बाद होती है। लेकिन कानून अपना काम करता है।

चंदौली जनपद के थाना बलुवा के खंडवारी चहनियां निवासी धर्मचंद्र जायसवाल ने अपनी पुत्री रेनू जायसवाल की शादी पटखवलिया रेलवे स्टेशन जमानिया के गोपाल जायसवाल के साथ 30 नवंबर 2013 को किया था और अपने सामर्थ्य अनुसार उपहार भी दिया। उपहार आप समझ रहे होंगे।

लेकिन उसके ससुराल वालो का मन नहीं भरा, लालच बढ़ती गई और दहेज में मोटरसाइकिल की मांग करते रहे। 3 दिसंबर 2016 को सूचना पर धर्मचंद्र अपने पत्नी के साथ अपने लड़की के ससुराल गए तो देखा कि उनकी लड़की मृत पड़ी थी। धर्मचंद्र ने घटना की सूचना थाना जमानिया में दी और पुलिस द्वारा आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया।
विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया। इस दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से अखिलेश सिंह ने कुल 10 गवाहों को पेश किया। सभी गवाहों ने अपना-अपना बयान न्यायालय में दर्ज कराया। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने सजा सुनाई।

गाजीपुर के फास्ट ट्रैक प्रथम न्यायाधीश कुश कुमार की अदालत में बुधवार को पति समेत सास, जेठानी को 10 साल की कड़ी कैद के साथ 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।

ये जानकारी अभियोजन के अनुसार थी और समाचार पत्र में भी प्रकाशित है। लेकिन सवाल पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के सम्मान का है। अब इसका एक ही रास्ता नज़र आता है कानून। बशर्ते महिलाएं भी इसका दुर्पयोग न करें।

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