पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर करीब 93% मतदान दर्ज किया गया है। अगर यही रुझान दूसरे और अंतिम चरण की 142 सीटों पर भी जारी रहता है, तो यह राज्य के इतिहास का सबसे अधिक वोटर टर्नआउट हो सकता है। इससे पहले 2021 के चुनाव में लगभग 82% मतदान हुआ था। इस बार बढ़ी हुई वोटिंग ने राजनीतिक विश्लेषकों और दलों दोनों की नजरें अपनी ओर खींच ली हैं।
इतिहास में वोटिंग और सत्ता परिवर्तन का संबंध:
आजादी के बाद पश्चिम बंगाल (West Bengal) में कुल 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें केवल 4 बार सत्ता परिवर्तन हुआ। इनमें से 3 बार ऐसा देखा गया कि जब मतदान प्रतिशत में 4.5% से ज्यादा का बदलाव आया, तब सरकार बदली। वहीं 2011 में जब ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने 34 साल पुराने लेफ्ट शासन को समाप्त किया, उस समय वोटिंग में 2.4% की बढ़ोतरी हुई थी।
SIR के बाद बदला वोटिंग का गणित:
इस बार रिकॉर्ड मतदान के पीछे एक बड़ा कारण SIR प्रक्रिया को माना जा रहा है, जिसके तहत करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। इससे राज्य में कुल रजिस्टर्ड वोटर्स की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 6.75 करोड़ रह गई, यानी लगभग 11.8% की कमी आई।
कोलकाता (Kolkata) की सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी (Shikha Mukherjee) के अनुसार, वोट देने वालों की संख्या लगभग समान रहने के बावजूद कुल मतदाताओं की संख्या घटने से प्रतिशत में वृद्धि दिखाई दे रही है।
इसी तरह VoteVibe (VoteVibe) के फाउंडर अमिताभ तिवारी (Amitabh Tiwari) का मानना है कि 2021 जितनी वास्तविक वोटिंग संख्या बनाए रखने के लिए इस बार कम से कम 86% टर्नआउट जरूरी है, जो अपने आप में रिकॉर्ड स्तर है।
सेफोलॉजिस्ट जय मृग (Jai Mrug) के अनुसार, SIR के बाद लोगों में यह धारणा बनी है कि अगर उन्होंने वोट नहीं दिया तो उनका नाम सूची से हट सकता है, जिससे मतदान के प्रति गंभीरता बढ़ी है। वहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रभाकरमणि तिवारी (Prabhakarmani Tiwari) मानते हैं कि SIR के विरोध में भी लोगों ने अधिक संख्या में मतदान किया।
महिला वोटर्स को लेकर दलों की रणनीति:
चुनाव में महिला मतदाता एक निर्णायक भूमिका निभाती दिख रही हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने लक्ष्मीर भंडार योजना की राशि बढ़ाने का वादा किया है, जिससे करीब 2.4 करोड़ महिलाओं को लाभ मिलने की बात कही गई है। साथ ही महिला सुरक्षा के लिए पिंक बूथ और पेट्रोलिंग टीम जैसी पहल का भी आश्वासन दिया गया है।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता, मुफ्त बस यात्रा और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण देने का वादा किया है। पिछले कुछ चुनावों में यह देखा गया है कि महिलाओं के लिए बनाई गई योजनाएं चुनावी नतीजों को काफी हद तक प्रभावित करती हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और घटती हिंसा का असर:
पश्चिम बंगाल (West Bengal) को पहले के चुनावों में हिंसा के लिए जाना जाता रहा है। ACLED (ACLED) के विश्लेषण के अनुसार, पिछले चुनावों में यहां सबसे अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गई थीं।
इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 2450 कंपनियां, यानी करीब 2.4 लाख जवान तैनात किए गए हैं। औसतन हर 150 वोटर्स पर एक सुरक्षाकर्मी मौजूद रहा।
कोलकाता (Kolkata) के सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य (Suman Bhattacharya) के अनुसार, इस बार हिंसा में कमी आई है, जिससे अधिक लोग सुरक्षित महसूस करते हुए मतदान केंद्रों तक पहुंचे।
एंटी और प्रो-इनकंबेंसी का असर:
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) 2011 से लगातार सत्ता में हैं और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का 15 साल का शासन पूरा हो चुका है। इतने लंबे कार्यकाल में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों को लेकर असंतोष भी सामने आता है।
इसी को देखते हुए पार्टी ने 74 विधायकों के टिकट काटे और 15 की सीट बदली। Axis My India (Axis My India) के डायरेक्टर प्रदीप गुप्ता (Pradeep Gupta) का मानना है कि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद बदलाव की चाहत भी मतदाताओं को ज्यादा संख्या में मतदान के लिए प्रेरित कर सकती है।
हालांकि VoteVibe (VoteVibe) के सर्वे के अनुसार, अभी भी 41.6% मतदाता ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।
क्या ज्यादा वोटिंग से तय होगा विजेता?:
Indian Politics and Policy Journal (Indian Politics and Policy Journal) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, ज्यादा मतदान अक्सर कड़ी टक्कर का संकेत देता है। लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि किसे फायदा मिलेगा।
इलेक्शन एनालिस्ट प्रो. संजय कुमार (Sanjay Kumar) के अनुसार, 332 चुनावों के आंकड़ों में मतदान प्रतिशत और नतीजों के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया।
अहमदाबाद यूनिवर्सिटी (Ahmedabad University) के प्रोफेसर नीलांजन सरकार (Neelanjan Sircar) का मानना है कि ज्यादा मतदान कभी-कभी मतदाताओं के भरोसे को भी दर्शाता है, जहां वे अपने पसंदीदा नेता को मजबूत करने के लिए बाहर निकलते हैं।
निष्कर्ष:
पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इस बार का रिकॉर्ड मतदान कई कारणों का परिणाम है, जिसमें SIR, महिला मतदाता, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक रणनीति शामिल हैं। हालांकि बढ़ा हुआ वोटर टर्नआउट किस पार्टी के पक्ष में जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। चुनाव परिणाम ही इस सियासी गणित का असली जवाब देंगे।
#Tag: #WestBengalElection, #VotingTurnout, #MamataBanerjee, #BJPvsTMC, #ElectionAnalysis
Disclaimer: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।

