लखनऊ में जल संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर एक अहम पहल के तहत वाटरशेड महोत्सव का आयोजन किया गया। राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस महोत्सव का भव्य उद्घाटन प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह (Swatantra Dev Singh) ने किया। कार्यक्रम में जल संकट, वर्षा जल संचयन और वाटरशेड विकास से जुड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बड़ी संख्या में अधिकारी, विशेषज्ञ और आमजन इस आयोजन में शामिल हुए।
जल संरक्षण को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं:
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में वाटरशेड प्रबंधन जल संरक्षण का एक प्रभावी और टिकाऊ माध्यम है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और जल संसाधनों के संतुलित उपयोग के लिए निरंतर योजनाएं लागू की जा रही हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
वाटरशेड प्रबंधन से ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ:
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वाटरशेड विकास कार्यक्रमों का सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिल रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से न केवल भूजल स्तर में सुधार हो रहा है, बल्कि किसानों और ग्रामीण आबादी को भी जल संकट से राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन की यह व्यवस्था कृषि उत्पादन को बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक साबित हो रही है।
जनभागीदारी से बनेगा जल आंदोलन:
स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों, जल विशेषज्ञों और स्वयंसेवी संगठनों से आह्वान किया कि जल संरक्षण को केवल सरकारी प्रयास तक सीमित न रखा जाए। उन्होंने कहा कि जब तक आम जनता की भागीदारी नहीं होगी, तब तक जल संरक्षण के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो सकते। तकनीक और जनसहभागिता के माध्यम से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है।
प्रदर्शनियों और तकनीकी प्रस्तुतियों का आयोजन:
वाटरशेड महोत्सव के दौरान जल संरक्षण से जुड़ी विभिन्न प्रदर्शनियां लगाई गईं। इन प्रदर्शनियों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिससे उपस्थित लोगों को जल संरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला।
अधिकारियों और विशेषज्ञों की सहभागिता:
इस महोत्सव में विभिन्न विभागों के अधिकारी, जल विशेषज्ञ, स्वयंसेवी संगठन और पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने जल संरक्षण को लेकर अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में इस दिशा में और प्रभावी कदम उठाने पर सहमति जताई। कार्यक्रम का उद्देश्य जल संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समन्वित प्रयासों को प्रोत्साहित करना रहा।
जल संरक्षण से जुड़े प्रयासों को मिलेगी गति:
कार्यक्रम के समापन अवसर पर यह संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल एक दिन का विषय नहीं है, बल्कि इसे निरंतर अपनाने की आवश्यकता है। वाटरशेड महोत्सव जैसे आयोजन समाज में जागरूकता फैलाने और जल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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