गाजीपुर। जिला कारागार के नए जेलर वीरेंद्र कुमार वर्मा को 48 घंटे में वापस बुला लिया गया। उनकी जगह लखनऊ जिला जेल से सुनील दत्त मिश्रा को विशेष ड्यूटी पर गाजीपुर भेजने का आदेश जारी हुआ है। ऐसा क्यों हुआ? इसके पीछे की वजह क्या है? ये बड़ा सवाल है।
ख़बर के अनुसार डीजी जेल पीवी रामा शास्त्री के मुताबिक, सुनील दत्त मिश्रा का कार्यकाल दो महीने या फिर नई तैनाती तक रह सकता है। 17 मार्च को वीरेंद्र कुमार वर्मा ने कार्यभार संभाला था लेकिन उनके तैनाती का आदेश बुधवार (19 मार्च) को निरस्त कर दिया गया। वह केंद्रीय कारागार वाराणसी की व्यवस्थाएं ही देखते रहेंगे।
दरअसल पिछले दिनों गाज़ीपुर जेल में अवैध तरीके से पीसीओ जैसी व्यवस्था संचालित होने के मामले में जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया गया था। उनकी जगह मऊ के जेल अधीक्षक आनंद शुक्ला को चार्ज सौंपा गया।
तो वहीं, निलंबित जेलर राकेश कुमार वर्मा की जगह विशेष ड्यूटी पर वीरेंद्र कुमार वर्मा को केंद्रीय कारागार वाराणसी से गाज़ीपुर भेजा गया था। वीरेंद्र की तैनाती का आदेश 16 मार्च की देर रात जारी हुआ था। उन्होंने 17 मार्च की सुबह दस बजे कार्यभार भी संभाला लेकिन 19 मार्च की देर शाम तक वापसी का आदेश जारी हो गया।
क्यों वापस बुलाए गए जेलर?
ख़बर के अनुसार एक अप्रैल 2023 को बांदा जेल से प्रतिबंधित सामग्री बरामद हुई थी और उसी इसी जेल में मुख्तार अंसारी को भी रखा गया था। आरोप लगा कि वीरेंद्र कुमार वर्मा ने मुख्तार अंसारी सहित अन्य बंदियों-कैदियों को विशेष सुविधा मुहैया करवाई। इसके बाद वीरेंद्र का नाम चर्चाओं में आ गया।
उस समय डीजी जेल रहे एसएन साबत ने एक्शन लिया और वीरेंद्र कुमार वर्मा को हटाकर 20 अप्रैल 2023 को फतेहगढ़ जेल भेज दिया था। उसके बाद बांदा मामले की जांच रिपोर्ट आई और इस जांच में दोषी पाए जाने के बाद 14 जुलाई 2023 को वीरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया था। वीरेंद्र को करीब 15 महीने के निलंबन के बाद नवंबर-2024 में बहाल किया गया और केंद्रीय कारागार वाराणसी में तैनाती दी गई। लेकिन गाज़ीपुर के जेल कांड ने वीरेंद्र को उस जनपद में पहुंचाया दिया जो मुख़्तार अंसारी के नाम से पहले से चर्चाओं में है। फिर क्या था 48 घंटे के अंदर मुख़्तार के मददगार कहे जाने वाले जेलर को गाज़ीपुर से वापसी कर दी गई।