लखनऊ (Lucknow) में चल रहे यूपी विधानमंडल के बजट सत्र के चौथे दिन सदन के दोनों सदनों में तीखी बहस और हंगामे का माहौल देखने को मिला। विधानपरिषद में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा के सवालों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, वहीं विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री नंद गोपाल नंदी और विधायक रागिनी सोनकर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पूरे घटनाक्रम के दौरान स्पीकर सतीश महाना को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा।
विधानपरिषद में मेडिकल कॉलेज पर बहस:
विधानपरिषद में सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कन्नौज में बने मेडिकल कॉलेज का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में अस्पताल की इमारत तैयार हो गई थी, लेकिन अब तक वह पूरी तरह संचालित नहीं हो सकी। उन्होंने सरकार पर दोहरे व्यवहार का आरोप लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा।
इस पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल भवन निर्माण से अस्पताल संचालित नहीं हो जाते, बल्कि उनके लिए संसाधन, व्यवस्थाएं और पारदर्शिता भी आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कार्यकाल में निर्माण कार्यों में अनियमितताएं हुईं और ठेके परिचितों को दिए गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए ग्रामीण संदर्भ की एक कहानी भी सुनाई, जिसके माध्यम से उन्होंने व्यवस्था की तुलना करते हुए अपनी बात रखी।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान हंगामा:
इधर विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान स्थिति गरम हो गई। मंत्री नंद गोपाल नंदी जब विधायक रागिनी सोनकर के प्रश्न का उत्तर देने के लिए खड़े हुए तो वे पहले प्रश्न की पंक्तियां पढ़ने लगे। इस पर स्पीकर सतीश महाना ने उन्हें टोकते हुए सीधे उत्तर देने को कहा।
मंत्री ने अपने उत्तर में उदाहरण देते हुए टिप्पणी की, जिस पर रागिनी सोनकर ने आपत्ति जताई। इसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। स्पीकर ने हस्तक्षेप कर मंत्री से कहा कि जो प्रश्न पूछा गया है, उसी का उत्तर दिया जाए। इस दौरान मंत्री ने इन्वेस्टर समिट का उल्लेख करना शुरू किया, जिस पर फिर से आपत्ति दर्ज की गई।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज:
बहस के दौरान मंत्री ने सपा के पूर्व कार्यकाल का उल्लेख करते हुए राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पूर्व में सरकार कई बार सत्ता में रही, लेकिन अपेक्षित विकास नहीं हो सका। सोशल मीडिया के संदर्भ में भी टिप्पणी की गई, जिससे विपक्ष की ओर से विरोध तेज हो गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को बोलने का अवसर दिया गया, जिन्होंने प्रश्नों का उत्तर प्रस्तुत किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।
सदन में अनुशासन पर जोर:
पूरे घटनाक्रम के दौरान स्पीकर सतीश महाना ने बार-बार सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्नकाल का उद्देश्य रचनात्मक चर्चा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। बजट सत्र के महत्वपूर्ण चरण में हुई इस नोकझोंक ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया, हालांकि कार्यवाही नियमानुसार आगे बढ़ती रही।
यूपी विधानमंडल के बजट सत्र में चौथे दिन की कार्यवाही ने यह संकेत दिया कि सत्ता और विपक्ष के बीच मुद्दों को लेकर तीखी बहस जारी है। मेडिकल कॉलेज और विकास कार्यों से जुड़े प्रश्नों पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे।
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