प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट (Cabinet) बैठक में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव भी स्वीकार किया गया है। इस फैसले के बाद राष्ट्रीय गीत के सम्मान और संरक्षण को लेकर कानूनी दायरा और मजबूत होने की बात कही जा रही है।
कैबिनेट बैठक में लिए गए इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भाजपा की जीत के बाद हुई इस पहली बड़ी बैठक में मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई भी दी। सरकार का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ देश की भावनाओं और स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान रहा है, इसलिए इसे विशेष दर्जा दिया गया है।
कानून में संशोधन का प्रस्ताव:
सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में बदलाव का प्रस्ताव स्वीकार किया है। प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद ‘वंदे मातरम’ पर भी वही नियम लागू होंगे जो वर्तमान में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लिए निर्धारित हैं।
मौजूदा कानून के अनुसार राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। अब ‘वंदे मातरम’ को भी इसी कानूनी सुरक्षा के दायरे में शामिल करने की तैयारी की गई है। इससे राष्ट्रीय गीत की गरिमा बनाए रखने और उसके सम्मान को सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
अपमान पर होगी सख्त कार्रवाई:
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के सम्मान में बाधा उत्पन्न करता है या उसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। वर्तमान नियमों के तहत राष्ट्रगान में व्यवधान डालने पर तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का नियम भी लागू है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि ‘वंदे मातरम’ को भी इसी कानूनी दायरे में शामिल किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय गीत की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
150वीं वर्षगांठ के बीच बड़ा फैसला:
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि देश इस समय ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। बंकिम चंद्र चटर्जी (Bankim Chandra Chatterjee) द्वारा रचित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। ऐसे समय में इसे राष्ट्रगान के समान दर्जा देने का निर्णय सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया गया कि पिछले वर्ष दिसंबर में संसद (Parliament) में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया था। इसके बाद सरकार ने इस विषय पर विचार करते हुए अब प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।
राष्ट्रीय सम्मान को लेकर सरकार का संदेश:
सरकार के इस फैसले को राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2005 में कानून में संशोधन कर तिरंगे के अपमानजनक उपयोग पर रोक लगाने के प्रावधान किए गए थे। अब राष्ट्रीय गीत को भी कानूनी संरक्षण देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। समर्थकों का कहना है कि इससे राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ेगी, जबकि कानून लागू होने के बाद इसके उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई संभव होगी।
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