रिपोर्टर: जेड ए खान
अमेरिका की राजनीति और वैश्विक व्यापार पर असर डालने वाला एक अहम कदम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान है। इसमें भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। इकोनॉमिक टाइम्स (Economic Times) की रिपोर्ट के अनुसार, इस बिल के पारित होने की स्थिति में 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
यह बिल पिछले कई महीनों से अमेरिकी संसद में चर्चा का विषय बना हुआ था। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) ने जानकारी दी कि बुधवार को व्हाइट हाउस (White House) में राष्ट्रपति से बातचीत के बाद इसे संसद में पेश करने की मंजूरी दी गई है। संभावना है कि इसे अगले सप्ताह वोटिंग के लिए लाया जाएगा।
क्या है सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025:
इस प्रस्तावित कानून का नाम सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025 (Sanctioning Russia Act 2025) रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। अमेरिका का आरोप है कि रूस को सस्ता कच्चा तेल बेचकर कई देश अप्रत्यक्ष रूप से उसे युद्ध लड़ने में मदद कर रहे हैं। इसी कड़ी में इस एक्ट के जरिए रूस के ऊर्जा, बैंकिंग और रक्षा क्षेत्रों को निशाने पर लिया गया है।
ऊर्जा, बैंकिंग और डिफेंस सेक्टर पर सख्ती:
बिल के तहत रूसी तेल और गैस कंपनियों, बड़े बैंकों और डिफेंस इंडस्ट्री पर सख्त प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों से जुड़े वैश्विक नेटवर्क पर भी कार्रवाई की बात कही गई है। अमेरिका का कहना है कि जब तक रूस की आर्थिक रीढ़ पर चोट नहीं की जाएगी, तब तक युद्ध को रोकने का दबाव प्रभावी नहीं होगा।
तीसरे देशों पर सेकेंडरी सैंक्शन का प्रावधान:
सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025 की सबसे अहम और विवादित धारा सेकेंडरी सैंक्शन से जुड़ी है। इसके तहत वे देश, कंपनियां या बैंक भी अमेरिकी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं, जो किसी भी तरीके से रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते पाए जाएंगे। यानी रूस के साथ घुमावदार रास्तों से व्यापार करने वाले देशों पर भी टैरिफ और अन्य आर्थिक पाबंदियां लग सकती हैं।
रूसी संपत्तियों को यूक्रेन के पुनर्निर्माण में उपयोग की तैयारी:
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों को यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए इस्तेमाल करने की कानूनी व्यवस्था की जाए। इससे युद्ध के दौरान हुए भारी नुकसान की भरपाई करने का रास्ता खुलेगा।
क्यों जरूरी माना जा रहा है यह कानून:
डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पहले जारी किए गए कार्यकारी आदेशों के जरिए रूस पर जो प्रतिबंध लगाए गए थे, उन्हें अब कानून का रूप देने की तैयारी है। इस एक्ट के लागू होने के बाद भविष्य में कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति अकेले अपने फैसले से इन प्रतिबंधों को हटा नहीं सकेगा। किसी भी तरह की छूट या राहत के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होगी। हालांकि बिल में राष्ट्रपति को विशेष छूट यानी प्रेसिडेंशियल वेवर देने का प्रावधान भी रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर दबाव की रणनीति में लचीलापन रखा जा सके।
सीनेट में भारी समर्थन:
यह बिल पूरी तरह बाइपार्टिसन यानी द्विदलीय समर्थन वाला बताया जा रहा है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल (Richard Blumenthal) ने मिलकर इसे पेश किया है। ग्राहम के अनुसार, फिलहाल इस बिल के 85 को-स्पॉन्सर हैं, जो सीनेट के 80 प्रतिशत से अधिक सांसदों का समर्थन दर्शाता है।
भारत पर पहले से टैरिफ का दबाव:
रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका पहले ही भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है। इसके चलते भारत पर कुल टैरिफ बोझ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अगर सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025 पास हो जाता है, तो भारत के लिए यह चुनौती और बढ़ा सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को लेकर पहले से ही दबाव की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर निर्यात पर देखा जा रहा है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर नजर:
भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद को सुलझाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। भारत चाहता है कि कुल 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 15 प्रतिशत किया जाए और रूस से तेल खरीद पर लगाई गई अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनल्टी को पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं से नए साल में किसी ठोस नतीजे की उम्मीद जताई जा रही है।
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