ईरान जब चाहे तब होर्मुज बंद करेगा! अमेरिका खुद मान रहा- तेहरान को ब्रह्मास्त्र मिल गया है

अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक नई चेतावनी जारी की है। सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के बाद ईरान पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली स्थिति में पहुंच गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अब ऐसे रणनीतिक विकल्पों की स्थिति में है, जिनका असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

रिपोर्ट से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी एजेंसियों का आकलन है कि युद्ध के बाद ईरान के पास ऐसी क्षमताएं विकसित हुई हैं, जिनके कारण वह महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों को प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच सकता है। इस आकलन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंताओं को जन्म दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता:

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान अब जब चाहे होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में समुद्री गतिविधियों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्थिति वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए चुनौती बन सकती है। सूत्रों के अनुसार युद्ध के बाद ईरान को ऐसी अतिरिक्त रणनीतिक क्षमता प्राप्त हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि परमाणु वार्ता आगे नहीं बढ़ती या किसी कारण से बाधित होती है, तो यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों के माध्यम से बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट (Bab-al-Mandeb Strait) क्षेत्र में भी संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसी स्थिति में दुनिया के दो महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग एक साथ प्रभावित हो सकते हैं।

होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही का आश्वासन:

इस बीच ईरान (Iran) और ओमान (Oman) ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस बयान को वैश्विक व्यापार जगत के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

ट्रम्प का हिजबुल्लाह पर बयान:

अमेरिका (America) के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कहा कि यदि इजराइल (Israel) हिजबुल्लाह (Hezbollah) के खिलाफ कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है, तो सीरिया (Syria) इस जिम्मेदारी को संभाल सकता है। उनके इस बयान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

लेबनान में संघर्ष समाप्त करने की मांग:

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने कहा कि केवल ईरान में संघर्ष रुकना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने लेबनान (Lebanon) समेत अन्य मोर्चों पर भी युद्ध समाप्त करने की मांग की। साथ ही उन्होंने दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की वापसी की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

चीन ने दी बातचीत को लेकर चेतावनी:

चीन (China) के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) ने अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच बन रही सहमति को अंतिम समाधान नहीं बल्कि एक नई शुरुआत बताया है। उन्होंने कहा कि वार्ता का अगला चरण पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है और स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को निरंतर प्रयास करने होंगे।

समझौते का दस्तावेज जल्द हो सकता है सार्वजनिक:

डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कहा है कि आने वाले कुछ दिनों में अमेरिका-ईरान समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते की शर्तों को विस्तार से सामने रखेंगे ताकि लोगों को इसकी सही जानकारी मिल सके।

संसदीय समीक्षा की संभावना:

ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया है कि समझौते को समीक्षा के लिए संसद में भेजा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो समझौते की शर्तों की जांच, सुनवाई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगे जाने जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं। इसके अलावा सांसद इसके समर्थन और विरोध में बहस भी कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि अमेरिका (America) में कई समूह और सांसद ईरान (Iran) को आर्थिक राहत या प्रतिबंधों में ढील देने के प्रस्तावों को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। हालांकि यदि समझौते को संसदीय समर्थन मिल जाता है तो उसकी वैधता और मजबूती बढ़ सकती है।

19 जून को हो सकते हैं हस्ताक्षर:

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह कार्यक्रम स्विट्जरलैंड (Switzerland) के लूसर्न (Lucerne) के निकट स्थित बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट (Bürgenstock Resort) में आयोजित होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और ईरान की ओर से मोहम्मद बाघेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) हस्ताक्षर कर सकते हैं।

समझौते में क्या हो सकते हैं प्रावधान:

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रस्तावित समझौता 14 बिंदुओं पर आधारित दस्तावेज हो सकता है। इसमें युद्ध समाप्त करने, होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने, ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत, तेल निर्यात जारी रखने की अनुमति, जमे हुए फंड जारी करने और आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए निवेश जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

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