उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में पिछले तीन दिनों से मौसम ने अचानक करवट ले ली है। शुक्रवार सुबह से ही गोरखपुर, बलिया, देवरिया सहित कुल 8 जिलों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। पूर्वांचल क्षेत्र के अधिकांश इलाकों में घने बादल छाए हुए हैं और तेज हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग ने प्रदेश के 62 जिलों में आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई है, जिससे लोगों में सतर्कता बढ़ गई है।
रातभर आंधी-बारिश से जनजीवन प्रभावित:
गुरुवार देर रात लखनऊ, सीतापुर, फर्रुखाबाद, पीलीभीत और गोंडा में तेज आंधी के साथ भारी बारिश हुई। फर्रुखाबाद की अनाज मंडी में रखी 1000 से अधिक गेहूं की बोरियां बारिश में भीग गईं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। वहीं पीलीभीत में एक शादी के दौरान दूल्हे की कार कीचड़ में फंस गई, जिसे करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकाला जा सका।
पेड़ उखड़े, बिजली व्यवस्था ठप:
मैनपुरी में आंधी का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला, जहां 100 से अधिक पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। इसके चलते सैकड़ों गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। आंधी और बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में बीते 36 घंटों के भीतर 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
तापमान में गिरावट से मिली राहत:
प्रदेश में औसतन 2.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जिससे भीषण गर्मी और हीटवेव से लोगों को राहत मिली है। तापमान में 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। कुछ दिन पहले 27 अप्रैल को बांदा का तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस था, जो दुनिया में सबसे अधिक दर्ज किया गया था, लेकिन अब यह घटकर 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
ओलावृष्टि और बारिश का असर:
गुरुवार को गाजियाबाद, नोएडा, ललितपुर, आगरा और मथुरा समेत 10 जिलों में ओलावृष्टि हुई, जबकि 25 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई। उसी दिन जालौन प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान:
लखनऊ स्थित मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार उत्तरी पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के आसपास बना चक्रवाती सिस्टम अब समाप्त हो चुका है। हालांकि 2 मई से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसका असर उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। इसके चलते आने वाले दिनों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है।
फसलों को नुकसान, किसानों की चिंता बढ़ी:
लगातार हो रही बारिश का असर खेती पर भी पड़ा है। विशेष रूप से सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। खीरा, ककड़ी, खरबूज और तरबूज जैसी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। किसानों का कहना है कि अधिक नमी के कारण फसलें सड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
सरकार का एक्शन, मुआवजे के निर्देश:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए अधिकारियों को तुरंत फील्ड में उतरकर नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सर्वे रिपोर्ट जल्द तैयार कर शासन को सौंपी जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके।
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